पेस्टिसाइड, रसायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग से जमीन की उपजाउता हो रही खत्म


युवा कार्यशाला सहकारीता एवं जैविक कृषि में कराया प्रण, हर साल 1 बीघा भूमि या आधा बीघा भूमि को जैविक में बदलेंगे
उज्जैन। भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ की सहकारी शिक्षा क्षेत्रीय परियोजना द्वारा सेवा सहकारी संस्था मर्यादित पंथपिपलाई के ग्राम रामवसा में एक दिवसीय युवा कार्यशाला ’सहकारिता एवं जैविक कृषि“विषय पर आयोजित की गई।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि कैलाश मकवाना प्रबंधक सेवा सहकारी संस्था मर्यादित पंथपिपला थे। अध्यक्षता चन्द्रशेखर बैरागी परियोजना अधिकारी सहकारी शिक्षा क्षेत्रीय परियोजना एवं विषय विशेषज्ञ अखिलेश दास जैविक कृषि रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मकवाना ने सहकारिता विषय पर प्रकाश डालते हुए कहां कि सहकारिता व्यापक जनांदोलन है जिसमें ग्रामीण क्षेत्र के हर व्यक्ति को इसमें प्रतिभागी बनना चाहिए ताकि हम प्रत्येक ग्रामीण प्रतिभागी कि सहकारिता के माध्यम से सारी सुविधाएं समय पर उपलब्ध करा सकें। सहकारिता क्षेत्र विस्तृत क्षेत्र है यदि इसमें जन भागीदारी बढ़ाई जाए तो ग्रामीण स्तर पर कई कृषि उद्योगों का विकास किया जा सकता है। कृषि विशेषज्ञ अखिलेश दास ने कहा कि आज हमने पेस्टिसाइड एवं रसायनिक खादों का अंधाधुंध उपयोग कर जमीन को इतनी (हार्ड) ठोस कर दी है कि हमें अपने ट्रैक्टरों के हॉर्स पावर बढ़ाना पढ़ रहे हैं। मालवा की माटी के लिए एक कहावत बड़ी प्रसिद्ध थी ’मालवा की माटी बड़ी धीर गंभीर पग-पग रोटी पग-पग निर“ लेकिन हमारी जमीन आज पंजाब प्रांत की ओर बढ़ रही है, मतलब उपजाऊता खत्म हो रही है। जिसका मुख्य कारण है हमारे भूमि के जो मित्र जीवांश उसके बाद है वह बहुत नीचे चले गए हैं। हमें उन्हें वापस सक्रिय कर जमीन के ऊपर लाकर उनकी मात्रा बढ़ाना है। यह हम आसानी से कर सकते हैं क्योंकि हमारे पास प्रचूर मात्रा में संसाधन उपलब्ध वह भी न्यूनतम खर्च पर हमें सिर्फ अपने शारीरिक श्रम और उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता है जहां तक मार्गदर्शन का सवाल है। आपको सहकारी संस्था एवं परियोजना द्वारा समय-समय पर मिलता रहेगा। बस आप लोग मिलकर एक प्रण करें कि हम हर साल 1 बीघा भूमि या आधा बीघा भूमि को जैविक में बदलेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए चंद्रशेखर बैरागी ने कहा कि हम लोग समय-समय पर ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं के बीच इस प्रकार के कार्यशाला का आयोजन करते रहें रहते हैं क्योंकि वर्तमान समय में विश्व में सबसे अधिक युवा है तो वह भारतवर्ष में है और हम चाहते हैं कि हर युवा को ग्रामीण क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर ही कुछ ऐसा रोजगार मिले कि उसे कहीं  अन्यत्र नहीं जाना पड़े। उसके लिए सहकारिता उचित माध्यम है। जिससे जुड़कर इसे अपनाकर हर युवा रोजगार प्राप्त कर सकता है और हम हमेशा ऐसा प्रयास करते रहेंगे। कार्यशाला का आयोजन एवं संचालन प्रेमसिंह झाला ने किया। इस कार्यशाला में विनोद मकवाना कृषि मित्र का सहयोग रहा। जगदीश नारायण सिंह ने सभी अतिथि विशेषज्ञ एवं प्रतिभागियों का आभार माना।


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