संसार में बड़ा हो या छोटा अपनी मृत्यु कोई नहीं टाल सकता
 

देवास। इस संसार में बड़ा हो या छोटा अपनी मृत्यु कोई नहीं टाल सकता। चाहे रोड़ पर अपनी पूरी जिंदगी काटने वाला कोई दीनहीन हो, चाहे महलों में रखकर कोई राजा अपना पूरा जीवन जी रहा हो। बावजूद इसके दोनों में समानता है की मृत्यु दोनों को ही आनी है, दोनों इसे टाल नहीं सकेंगे। उक्त उद्गार ग्राम अमोना में महांकाल मित्र मण्डल, करने वाला श्याम, कराने वाला श्याम, संस्था श्री गणेश एवं समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से चल रही श्रीमद भागवत कथा के द्वितीय दिवस पं. दुर्गेश शर्मा ने व्यक्त किए। नेशनल युनिटी ग्रुप के संस्थापक एवं सामाजिक कार्यकर्ता ठा. अनिलसिंह ने बताया कि कथा में बड़ी संख्या में आसपास के गांवो से भी श्रद्धालु आ रहे है। व्यासपीठ की आरती समस्त ग्रामीणों ने मिलकर की। महाराज जी ने आगे कहा कि सिंकंदर ने जब सारी दुनिया जीत ली थी और जब जीतने के बाद जब वे अपने घर गया तो उसकी मृत्यु करीब थी। मरने से पहले वे अपनी मां से मिलना चाहता था। उसकी मां उससे ज्यादा दूरी पर थी, उसे लाने में 24 घंटे लगने थे। सिकंदर ने कहा की मैं मरने से पहले अपनी मां के दर्शन करना चाहता हूं। आप लोगों को आधा साम्राज्य देता हूं, लेकिन कम से कम कोई ऐसी व्यवस्था करो, जिससे मैं अपनी मां के का दर्शन कर सकूं। नीम-हकीमों से भी कहा कि मुझे 24 घंटे का जीवन दे दो। वैद्य -हकीम ने कहा हम पूरी कोशिश करेंगे। फिर भी आपको 24 घंटे नहीं दे सकते। क्योंकि यह हमारे हाथ में नहीं है। हम सिर्फ इलाज कर सकते हैं।