उज्जैन के लालची डॉक्टर दंपत्ति की करतूतों से उज्जैन हुआ शर्मसार

उज्जैन- निसंदेह देश इस वक्त कठिन परीक्षा से जूझ रहा है कोरोना वायरस ने पूरे देश को ताले में बंद कर दिया है लेकिन आश्चर्य की बात है कि इस वायरस को विदेश से भारत में लाने वाले चंद लालची लोग शहर के नागरिकों की जान आफत में डालकर धन अर्जित करने में लगे हैं । ऐसे ही लालची डॉ गीता तिवारी एवं डॉ सुमित तिवारी ने ,विदेश यात्रा से लौटने के बाद स्वयं की कोरोना जांच ना करवाते हुए ,धन कमाने के उद्देश्य से, निजातपुरा स्थित अपना नर्सिंग होम खोल लिया और गर्भवती महिलाओं सहित सैकड़ों मरीजों का इलाज किया।
     केंद्र सरकार के निर्देश पर जब विदेश से आने वालों की जांच शुरू हुई तो प्रशासन, डॉक्टर दंपति तक पहुंचा और नर्सिंग होम बंद करवा कर ,होम अंडर क्वॉरेंटाइन  का पोस्टर चिपका दिया। पोस्टर पर 10 अप्रैल 2020 की तारीख डालकर नर्सिंग होम सील कर दिया ।सवाल ये उठता है कि डॉक्टर जैसा पढ़ा -लिखा जिम्मेदार नागरिक शहर के लोगों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ करता रहा इसके खिलाफ प्रशासन को सख्त कार्यवाही करना चाहिए।                                      क्या  प्रशासन सचमुच संवेदनशील है?                


प्रशासन अभी भी अंधेरे में तीर चला रहा है क्योंकि डॉक्टर दंपति ने विदेश से आने के बाद न तो स्वयं की जांच कराई बल्कि मरीज भी देखें डिलीवरी भी करवाई। प्रशासन ने इतने संवेदनशील मामले में सिर्फ निजातपुरा नर्सिंग होम सील कर परिवार के 6 सदस्यों को क्वॉरेंटाइन कर दिया है लेकिन प्रशासन ने अभी तक नर्सिंग होम का रिकॉर्ड जब्त नहीं किया है और ना ही उन मरीजों तक पहुंचा जिनका इलाज लालची तिवारी दंपति ने किया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि अभी रिकॉर्ड जब्त नहीं किया है