अनुसूचित जाति, जनजाति के साथ घटित अपराधों में न्यायालय सख्त

  सार्वजनिक स्थान पर जाती सूचक शब्दों का प्रयोग करने वाले आरोपियों की जमानत निरस्त कर जेल भेजा 


खिलचीपुर । माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी खिलचीपुर ने थाना भोजपुर के अपराध क्रमांक 207/20 में धारा 294, 323, 506, भादवि 3(1)(द), 3(1)(ध) एससी/एसटी एक्ट में अनुसूचित जाति के व्यक्ति के खिलाफ जाति सूचक शब्दों का उपयोग करने, मारपीटऔर उन्हे जान से मारने की धमकी देने वाले आरोपीगण उंकारलाल पिता घीसालाल तंवर, शिवलाल पिता घीसालाल तंवर, फूलसिंह पिता उंकारलाल तंवर सर्व निवासी ग्राम सेंदरी थाना भोजपुर जिला राजगढ का जमानत आवदेन खारिज कर जेल भेज दिया है।


 


           घटना की जानकारी देते हुए सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी मथुरालाल ग्वाल बताया कि फरियादी ने थाना भोजपुर में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर रिपोर्ट लेख कराई कि जब वह और उसका पति अपने खाते की जमीन बोने के लिए गए थे तो वहां मेड पड़ोसी उंकारलाल पिता घीसालाल तंवर, शिवलाल पिता घीसालाल तंवर, फूलसिंह पिता उंकारलाल तंवर ने कहा कि जमीन जो तुम्हारे खाते की है उसी को ही बोना और आरोपीगण चिल्लाचैंट करने लगे, जिसके बाद वह घर वापस आ गए। दूसरे दिन सुबह शिवलाल फरियादिया के पति को बुलाने आया और कहने लगा कि तुमने हमारी जमीन के हिस्से में फसल बो दी है। फरियादिया अपने पति के साथ शिवलाल के भाई उंकारलाल के घर आई और उंकारलाल से बोला कि हमने पटवारी ने जो हमें जगह नापकर दी है उसी जगह में हमने फसल बोई है। अभियुक्तगण जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल कर गाली गुफ्तार करने लगे। फिर तीनों आरोपीगण फरियादिया व उसके पति को मारने दौड़े । वहां फरियादी का बड़ा लड़का घनश्याम आया तो फूलसिंह ने लड़के का गला पकड़कर धक्का दिया और थापड़ की मारी । आरोपीगण ने सार्वजनिक रूप से अपमानित किया तथा जान से मारने की धमकी दी । फरियादी की रिपोर्ट पर आरक्षी केन्द्र भोजपुर में अपराध की कायमी कर विवेचना प्रारंभ की गई। विवेचना के दौरान अभियुक्तगण ने न्यायालय के समक्ष जमानत आवेदन प्रस्तुत कर जमानत की मांग की थी। 


 


 उक्त प्रकरण मे आरोपीगण उंकारलाल पिता घीसालाल तंवर, शिवलाल पिता घीसालाल तंवर, फूलसिंह पिता उंकारलाल तंवर ने जमानत हेतु न्यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर जमानत की मांग की थी। जिस पर अभियोजन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री मथुरालाल ग्वाल द्वारा ने न्यायालय के समक्ष तर्क प्रस्तुत कर जमानत का विरोध किया । एडीपीओ श्री मथुरालाल ग्वाल के तर्कों से सहमत होते हुये माननीय न्यायालय द्वारा आरोपीगण की जमानत खारिज कर जेल भेज दिया है।