गौ सेवक को पांच रुपए प्रति पशु मानदेय दिया जाता है जो बहुत ही कम है जिसे बढ़ा कर 25 रुपए प्रति पशु किया जाये

मध्यप्रदेश गौ सेवक ने मांगो को लेकर दिया ज्ञापन
उज्जैन। मध्यप्रदेश गौ सेवक ने एनएडीपीसी कार्यक्रम अंतर्गत एफएमडी टीकाकरण एवं आईएनएपीएच पोर्टल में एंट्री में आ रही समस्याओ के निराकरण प्रशासनिक सेवा में गौ सेवक पद पर कार्यरत गौ सेवक को निश्चित मानदेय देने सहित विभिन्न मांगो को लेकर कलेक्टर व पशु उपसंचालक को रैली निकलकर ज्ञापन दिया।
सेवक संघ के जिला अध्यक्ष अरविन्द सोलंकी ने बताया कि गौ सेवक शासन दुवारा चलाई जा रही पशुपालन विभाग की सम्पूर्ण योजनाओ का क्रियान्वन करता है, एनएडीपीसी कार्यक्रम में एफएमडी टीकाकरण करना, टेग लगाना, रजिस्टर में प्रविष्टि करना प्रत्येक पशुओ के नकुल कार्ड बनाना सहित आईएनएपीएच पोर्टल में ऑनलाइन एंट्री आदि कार्य करता है। इन कार्यो के एवज में गौ सेवक को पांच रुपए प्रति पशु मानदेय दिया जाता है जो बहुत ही कम है जिसे बढ़ा कर 25 रुपए प्रति पशु किया जाये। गाँव में पशु एक ही स्थान पर नहीं रहते इस कार्य के लिए किसानो के खेतो पर जाना पड़ता है इस कार्य के लिए जो सेवको को लिखित आदेश दिया न ही कोई परिचय पत्र दिया गया जिससे जो सेवक को कार्य करने मे कई प्रकार की समस्याए आती है। गौ सेवक एक दिन एक पशु का टीकाकरण करना, तेग लगाना, रजिस्ट्री में प्रविष्टि करना, नकुल कार्ड बनाना, ऑनलाइन एंट्री करने में २० से २५ मिनिट लगते है दिनभर में गौ सेवक २५ से ३० पशुओ का ही पंजीयन कर पाते है। जिससे उन्हें एक दिन में 150 ही मिलते है।
मध्यप्रदेश गौ सेवक संघ ने मांग की कि इस कार्य के लिए गौ सेवक को सरकार द्वारा जारी वचन पत्र के बिंदु क्रमांक 5.15 के अनुसार ग्राम प्रशासनिक सेवा में गौ सेवक पद का सृजन एवं चतुर्थ / तृतीय श्रेणी के शासकीय कर्मचारी को दिए जा रहे न्यूनतम मासिक वेतन आधार पर दिया जाये,राष्ट्रीय रोग नियत्रण कार्यक्रम या अन्य विभाग का कार्य करते समय किसी पशु को कोई समस्या आती है पशु पालक दुवारा कोई वाद दायर किया जाता है तो शासन जो सेवक का पूर्ण सहयोग करेगा ,न्यायलिन प्रकरण की कार्यवाही विभागीय स्टार पर करने की जवाबदारी लेगा लिखित में आदेश दिये जाए व् गौ  सेवक को परिचय पत्र जारी किये जाये द्य ज्ञापन में अध्यक्ष अरविंद सोलंकी ,रमेश डेवलिया , अनोखीलाल पांचाल,संजय परिहार, कमल प्रजापति,शुभम चौहान,विजय चौहान अदि उपस्थित थे।