कोरोना मरीजों के इलाज में गंभीर लापरवाही को प्रशासन ने माना, डॉक्टर हुए निलंबित

उज्जैन-
 जिला प्रशासन ने मान लिया है कि कोरोना वायरस से ग्रसित मरीजों का समय पर ना तो इलाज हो रहा है और न ही उन्हें समय पर सुविधाएं प्राप्त हो रही है। इसकी पुष्टि मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ अनसूया गवली द्वारा जारी प्रेस नोट से होती है। गवली ने डॉक्टर आरसी परमार सिविल सर्जन उज्जैन को पद से हटा दिया है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि सिविल सर्जन अपने कर्तव्यों का पर्याप्त सतर्कता से पालन नहीं कर रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि 2 अप्रैल को संदिग्ध कोरोना ग्रसित मरीज को समय पर सुविधाएं प्राप्त नहीं हो पाई एवं घटना की सूचना संबंधित अधिकारी एवं जिला प्रशासन को नहीं दी गई। उनका यह कृत्य गंभीर और घोर  लापरवाही माना गया है। डॉक्टर अनुसूया ने बताया कि शासकीय माधव नगर चिकित्सालय कोरोना अस्पताल के रूप में चिन्हित किया गया है और डॉक्टर आर पी परमार को इसका प्रभारी बनाया गया था। इसके बावजूद उनके द्वारा वेंटिलेटर का प्रबंध पर्याप्त रूप से नहीं किया जाना पाया गया और इसकी सूचना भी संबंधित अधिकारी एवं जिला प्रशासन को नहीं दी गई ।कोरोना संकट के दृष्टिगत उनकी यह लापरवाही क्षमा योग्य नहीं होने से उन्हें सिविल सर्जन के पद से तत्काल हटाकर डॉक्टर पी एन वर्मा को सिविल सर्जन का प्रभार सौंपा गया है।


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