प्रेरक कहानी" दीपा मोहन बनीं पहली प्लाज्मा डोनर


 


उज्जैन। आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज को डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल डिक्लेयर करने के बाद यहां कोरोना पॉजीटिव मरीजों का उपचार होने लगा। कोरोना पॉजीटिव मरीजों के उपचार के लिये यहां के डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ निरन्तर अमूल्य सेवाएं दे रहे हैं। इसी बीच यहां पर कार्यरत 37 वर्षीय स्टाफ नर्स सुश्री दीपा मोहन नर्सिंग कार्य करते हुए कोरोना वायरस से संक्रमित हो गई। दीपा बिलकुल घबराई नहीं और आरडी गार्डी में रहकर ही उन्होंने अपना उपचार कराया। आज से 20 दिन पहले वे गंभीर संक्रमण से मुक्त होकर अपने घर चली गई।


 


इस बीच आरडी गार्डी हॉस्पिटल में प्लाज्मा थैरेपी से कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों का उपचार किये जाने की योजना बनी। दीपा मोहन ने साहस दिखाते हुए सबसे पहले प्लाज्मा डोनर बनने का प्रस्ताव अस्पताल प्रशासन को दिया। उनका कहना है कि यदि कोरोना से लड़कर यदि व्यक्ति स्वस्थ हो गया है तो उसे प्लाज्मा डोनेट करने में कोई परेशानी नहीं होना चाहिये। दीपा ने कहा कि जो लोग ठीक होकर घर पहुंचे हैं उन पर ये जिम्मेदारी है कि वे रक्तदान कर अपना फर्ज निभायें और गंभीर रूप से संक्रमणग्रस्त कोरोना मरीजों की जान बचायें। प्लाज्मा डोनेट कर दीपा ने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। अब बारी अन्य कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों की है, जो स्वस्थ होकर घर लौट गये हैं। दीपा ने ऐसे सभी लोगों से आव्हान किया है कि डरे नहीं, आगे आकर दूसरे मरीजों की मदद करें। प्लाज्मा डोनेट करें।