सुरेश और लखन असली हीरो,,, टि्वटर युद्ध शुरू,,,,, वीडियो से ली गई तस्वीरें कुछ अलग ही कहानी बता रही है

उज्जैन। गैंगस्टर विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक भूचाल आ गया है, मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ साथ कांग्रेसी भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मैदान में कूद गए हैं। अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि विकास दुबे की गिरफ्तारी हुई है या सुनियोजित प्लान के तहत उसे सरेंडर करवाया गया है, सोशल मीडिया पर जारी कुछ वीडियो को देखने से लगता है कि कुख्यात और दुर्दांत अपराधी विकास दुबे ने बड़े आराम के साथ स्वयं को सरेंडर किया है, इस कहानी में सबसे अहम किरदार फूल बेचने वाला सुरेश और सुरक्षा गार्ड लखन है, सुरेश के मुताबिक कुख्यात अपराधी सुबह 7:00 बजे के लगभग महाकालेश्वर मंदिर दर्शन करने के लिए आया था और उसकी दुकान से प्रसाद खरीदा, शक होने पर सबसे पहले उसने ही सुरक्षा गार्ड लखन को संदिग्ध शख्स पर नजर रखने को कहा, इसके बाद सुरक्षा गार्ड लखन के मुताबिक उसने विकास दुबे  की हरकत पर लगभग 2 घंटे नजर रखी, इसी के साथ उसी ने पुलिस को भी सूचित किया। विकास दुबे के अलावा शहर के एक स्थानीय नागरिक को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है, सूत्रों के मुताबिक विकास के साथ कानपुर से आए दो वकीलों को भी पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया गया है। इधर इस मामले को लेकर राजनीति भी गरमा गई है, अलग-अलग ट्वीट पर श्रेय लेने की होड़ के बीच आरोप-प्रत्यारोप के दौर भी चल रहे हैं। महाकालेश्वर मंदिर के वी आई पी गेट से बड़े आराम से उसे साथ लेकर चल रहे तीन ,चार सुरक्षाकर्मी और कुछ पुलिसकर्मी नजर आ रहे हैं, यह वीडियो भी कुछ अलग ही कहानी बता रहा है, इस वीडियो से लिए गए स्क्रीनशॉट इस समाचार के साथ दिए जा रहे हैं। यह तस्वीरें कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही है, क्योंकि इन तस्वीरों के मुताबिक किसी भी सुरक्षा गार्ड या साथ चलने वाली पुलिस ने उसे पकड़ा नहीं है और विकास दुबे स्वयं अपनी मर्जी से साथ चलता दिखाई दे रहा है,,,,,,,,, आगे क्या सीआरपीसी की धारा 72 के मुताबिक अगर किसी अपराधी या आरोपी को दूसरे राज्य की पुलिस गिरफ्तार करती है, तो उसे 24 घंटे अंदर वहां की स्थानीय अदालत में पेश किया जाना ज़रूरी होता है. उसी स्थानीय कोर्ट से रिमांड लेकर ही दूसरे राज्य की पुलिस उसे अपने राज्य में ले जाती है. दरअसल, प्रत्यर्पण की अनुमति को ही ट्रांजिट रिमांड कहा जाता है.