महिला सुरक्षा विषय पर चार दिवसीय वर्चुअल कार्यशाला संपन्न


"महिला सुरक्षा"विषय पर प्रदेशस्तरीय वर्चुअल कार्यशाला का आयोजन मध्य प्रदेश लोक अभियोजन द्वारा किया गया जिसमें संपूर्ण मध्यप्रदेश से लगभग 25 विशेष लोक अभियोजन अधिकारीयों ने सहभागिता की। 


       अभियोजन मीडिया प्रभारी वर्षा जैन के अनुसार संपूर्ण प्रदेश के अभियोजन अधिकारी वेबीनार के माध्यम से कार्यशाला में सम्मिलित हुए। कार्यशाला संचालक अभियोजन मध्यप्रदेश विजय यादव के मार्गदर्शन में आयोजित की गयी। कार्यशाला में लोक अभियोजन संयुक्त संचालक एल.एस.कदम ने सर्वप्रथम अभियोजन अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहां कि महिलाओं के विरुद्ध हो रहे अपराधों को रोकने के लिए न्यायालय,पुलिस एवं अभियोजन अधिकारी को समावेशी दृष्टिकोण अपनाना होगा। इसके बाद कार्यशाला को संबोधित करते हुए सीनियर साइंटिफिक ऑफीसर एम.पी भास्कर ने लैंगिक उत्पीड़न के अपराधों में फॉरेनसिंक साक्ष्य और मेडिकल साक्ष्य की भूमिका एवं महत्व पर व्याख्यान दिया। इसके बाद ई- लाइब्रेरी सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण भी अभियोजन अधिकारियों को दिया गया।कार्यशाला के द्वितीय दिवस एम.पी स्टेट जुडिशल अकादमी के डिप्टी डायरेक्टर यशपाल सिंह द्वारा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की सुसंगतता बिंदु पर उपलब्ध कानूनों की समुचित विवेचना लेटेस्ट केस ला के परिपेक्ष्य में की गई ।साथ ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य कैसे कलेक्ट करना चाहिए इस बिंदु पर विस्तार से बताया गया।कार्यशाला के तृतीय दिवस डायरेक्टर चाइल्ड लाइन अर्चना साह द्वारा महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में अभियोजन के समक्ष आने वाली चुनौतियां एवं उनके समाधान के बारे में चर्चा की गई। कार्यशाला के अंतिम दिवस अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश खटीक एवं हेमंत जोशी द्वारा पीड़ित प्रतिकर योजना एवं साक्षी संरक्षण योजना के संबंध में विस्तार से बताया गया। इसके बाद आई.जी क्राइम अगेंस्ट वुमेन दीपिका सूरी द्वारा ट्रैफिकिंग एवं वुमेन सेफ्टी बिंदु पर चर्चा की गई। इसके बाद अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जिला सागर विधि सक्सेना द्वारा कार्यशाला को संबोधित करते हुए महिलाओं के विरुद्ध अपराध विषय पर उपलब्ध विधिक प्रावधानों की समुचित व्याख्या की गयी‌ ।उपरोक्त वर्चुअल कार्यशाला में एडीपीओ सीमा शर्मा द्वारा पोक्सो एक्ट के संबंध में तथा एडिशनल डीपीओ संदीप पांडे द्वारा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विरुद्ध होने वाले अपराधों के विषय में तथा डीपीओ केके सक्सेना के द्वारा गवाह के परीक्षण के दौरान आने वाले कठिनाइयों एवं अंतिम तर्क के संबंध में एवं गवाहों की सुरक्षा तथा पीड़ित की सुरक्षा विषय पर तथा एडीपीओ नितेश कृष्णन द्वारा पीआइएटी एक्ट के विषय में अपने अपने व्याख्यान दिए गए। कार्यशाला में अभियोजन अधिकारीयों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए। कार्यशाला के अंत में संयुक्त संचालक अभियोजन मध्य प्रदेश एल एस कदम द्वारा कार्यशाला में लिए गए विधिक ज्ञान की खुशबू को अपने-अपने जिलों में फैलाने के निर्देश दिए गए। कार्यशाला में सहभागिता करने वाले सभी विशेष लोक अभियोजन अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र वेबीनार के माध्यम से दिए गए।जिला झाबुआ से विशेष लोक अभियोजक वर्षा जैन द्वारा स्वयं कार्यशाला में सहभागिता की गई । कार्यशाला आयोजित करवाने में स्टेट आईटी कोआर्डिनेटर अमित शुक्ला एडीपीओ भोपाल का विशेष योगदान रहा।    


                    


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