7 दिन की सोमवती अमावस्या,?,,,,, सांसद जी का वीडियो वायरल,,,, लंबे लॉक डाउन पर सवाल उठे

 उज्जैन ।जिला प्रशासन द्वारा क्राइसिस कमेटी की बैठक का हवाला देते हुए और जनप्रतिनिधियों से चर्चा की दुहाई देते हुए 19 अप्रैल तक लगाए गए लॉकडाउन को लेकर विरोध के स्वर मुखर हो रहे हैं। इधर नेताओं के बेतुके बयानों ने यह सिद्ध कर दिया की आम जनता का इस लोकतंत्र में सिर्फ वोट देने तक का ही अधिकार है, हरिद्वार के कुंभ से उज्जैन को सोमवती अमावस के स्नान को जोड़कर भीड़ बढ़ने का जो हवाला सांसद जी ने दिया है वह अभूतपूर्व है ।और इस बात का प्रतीक भी है कि जनप्रतिनिधि उज्जैन शहर की जनता की भावनाओं की कितनी कद्र करते हैं। 

भारतीय जनता पार्टी के प्रखर नेता विजय अग्रवाल ने लंबे लॉकडाउन को लेकर विरोध जताया है और प्रश्न किया है की अचानक यह लंबा लॉकडाउन क्यों लगाया गया ,उन्होंने कहा कि उज्जैन के व्यापारी पहले से ही वेंटिलेटर पर है, अस्पतालों में चल रही लूट पर भी उन्होंने प्रश्न उठाया और कहा कि इस लूट को बंद करना चाहिए, साथ ही जनता को कोविड-19 से बचाव के लिए जागरूक करने की बजाय लॉकडाउन लगाने के निर्णय पर जनप्रतिनिधियों को फिर से एक बार विचार करना चाहिए।

 गोविंद खंडेलवाल का भी आरोप है कि अस्पतालों में जगह नहीं है, भर्ती होने के लिए जैक जरिया लगाना पड़ रहा है, रेमडेसीविर इंजेक्शन की कालाबाजारी पर भी उन्होंने प्रश्न उठाया है ।उनका कहना है कि इन मुद्दों पर नेताओं की चुप्पी आश्चर्यजनक है।

 इधर 14 अप्रैल से शुरू होने जा रहे रमजान को लेकर भी एक वर्ग विशेष चिंतित है।

सांसद अनिल फिरोजिया का बयान की हरिद्वार में कुंभ की वजह से उज्जैन में भीड़ लग जाएगी ,यह भीड़ उनके हिसाब से सोमवती अमावस पर रहेगी उनके इस बयान को भी बेतुका बताया जा रहा है ,लोग प्रश्न कर रहे हैं कि हरिद्वार के कुंभ से उज्जैन के सोमवती अमावस के स्नान का क्या लेना देना? बरहाल सांसद का यह बेतुका बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इन सबसे अलग सबसे बड़ा सवाल यह है कि अचानक लॉक डाउन की घोषणा से शहर के नागरिक हतप्रभ है। क्योंकि मुख्यमंत्री जी अनेक बार यह घोषणा कर चुके थे की वह स्वयं भी लंबे लॉकडाउन के पक्ष में नहीं है , फिर इस तरह से अचानक लॉकडाउन लगाने से जनता समझ नहीं पा रही है कि वह अपनी रोजमर्रा की वस्तुओं की पूर्ति कैसे करेगी। बंगाल चुनाव में प्रचार कर अचानक उज्जैन पहुंचने वाले नेताओं के बयान शहर की जनता के सीने पर कील ठोकने का काम कर रहे हैं शहर में श्मशान में जगह नहीं है अस्पतालों की हालत किसी से छुपी नहीं है दवाइयों की जमकर कालाबाजारी की जा रही है कुछ चिकित्सकों को छोड़ दे तो ,बाकी सब चमड़ी नोचने में लगे हैं ।

ऐसे बुरे वक्त पर नेताओं ने जनता की कोई सुध नहीं ली और अब लंबे लॉकडाउन को लेकर इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं मानो वे पूरे विश्व में इसके सबसे बड़े विशेषज्ञ हो, लंबे लॉकडाउन के बाद भी यदि कोरोना संक्रमण फैलने से नहीं रुका तो आज बयान देने वाले नेता कौन सा स्टेप उठाएंगे, लगे हाथ उन्हें इसकी भी घोषणा कर ही देना चाहिए।




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