हाल बेहाल,,,,, गंभीर मरीज के सामने मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं,,,,,,, जिले के प्रभारी मंत्री का फोन भी बंद ,,,,,,,प्रशासन ने भी जानकारी के लिए कोई नंबर सार्वजनिक नहीं किया,,,,,,, गंभीर मरीज क्या करें यह उसे बताने वाला कोई नहीं

 उज्जैन ।अस्पतालों में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर वाले बेड कहीं भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सांस की तकलीफ वाले  मरीज अपना इलाज कहां करवाया यह बताने को न तो जिला प्रशासन तैयार है ,और ना ही जनप्रतिनिधि ।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भले ही मध्यप्रदेश में बेड की कमी नहीं आने देंगे का बयान दे रहे हो लेकिन सत्यता यह है कि उज्जैन शहर के किसी भी अस्पताल में ऑक्सीजन वाले बेड उपलब्ध नहीं है ।कॉविड 19 अधिकृत अस्पताल माधव नगर में भी ओपीडी में 8 पॉइंट ऑक्सीजन के लगाए गए थे, इनसे वेटिंग वाले मरीजों को ऑक्सीजन देकर उनकी जान बचाई जा रही है ।वहां पहुंचने वाले अन्य मरीजों को जगह नहीं है का जवाब देकर अस्पताल से कहीं और जाने को कहा जा रहा है, लॉकडाउन के कारण निजी वाहनों के अलावा लोक परिवहन बंद होने से मरीज अस्पताल दर अस्पताल भटकने की स्थिति में भी नहीं है ।गंभीर अवस्था में पहुंचने वाले मरीज जिनके पास स्वयं का चार पहिया वाहन नहीं है वह क्या करें यह बताने को कोई तैयार नहीं है। जिले में कोरोना की स्थिति विकराल हो गई है और ऐसे में अस्पतालों में जगह नहीं होने के कारण मरीज के सामने मरने के अलावा और कोई चारा नहीं है ।दैनिक मालव क्रांति ने आज उज्जैन के 12 अस्पतालों में फोन लगाकर बेड की स्थिति जानना चाही लेकिन मायूसी के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा, आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में अधिकृत सुजान सिंह रावत का नंबर लगाने पर उन्होंने फोन नहीं उठाया, संजीवनी अस्पताल में अधिकृत नंबर फोन लगाने पर स्विच आप बताया,

पाटीदार ,चैरिटेबल ,पुष्पा मिशन, देशमुख ,सी एच एल, सहर्ष अस्पताल में भी फोन नहीं उठाया गया। गुरु नानक अस्पताल में बताया गया कि साधारण आइसोलेशन बेड उपलब्ध है। तेजनकर अस्पताल का नंबर बंद बताया गया। एसएस हॉस्पिटल और जीडी बिरला अस्पताल का नंबर कई बार लगाने के बाद भी नहीं लगा। स्पष्ट है कि शहर में स्थिति भयावह है और इस विकट स्थिति में आम मरीज के साथ कोई भी खड़ा होने को तैयार नहीं है । जिले के प्रभारी बनाए गए मंत्री मोहन यादव को भी उनके मोबाइल नंबर 94250 9 2255 पर शाम 6:00 बज कर 17 मिनट पर फोन लगाया लेकिन उनका मोबाइल बंद आया।आश्चर्य इस बात का है कि जिला प्रशासन कोई हेल्प डेस्क नहीं बनाई जिससे किस अस्पताल में कौन सा बेड उपलब्ध है इसकी जानकारी मरीज या उसके परिजन प्राप्त कर सकें। राष्ट्रीय आपदा घोषित कोरोना के मरीजों को पेमेंट देने के बावजूद अस्पतालों में उसने तक नहीं दिया जा रहा है यह बेहद खतरनाक संकेत है क्योंकि अनुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या और बढ़ भी सकती है क्योंकि अभी तक यह शहर में ही सीमित था लेकिन अब लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में भी कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आ रहे हैं इसके अलावा नया वायरस अब पूरे परिवार को चपेट में ले रहा है।


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