अब ब्लैक फंगस का कहर,, उज्जैन के युवक की इंदौर में मौत,,,, आरडी गाड़ी मेडिकल कॉलेज में 18 मरीज भर्ती,,,,,, एक की भर्ती होने के बाद मौत,उसे ब्लैक फंगस था या नहीं जांच भी नहीं हो सकी,,, चार के ब्रेन में पहुंचा फंगस,,,, 4 मरीज उज्जैन चैरिटेबल अस्पताल में भी भर्ती,,,,, टीम बनाकर रोकेगा प्रशासन फिलहाल इसे रोकना बड़ा चैलेंज हो सकता है

 

ब्लैक फंगस का पहला शिकार मृतक इमरान


  उज्जैन। कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस  आमजनों की मुसीबतें बढ़ा रहा है ब्लैक फंगस से मृत्यु दर 50% तक होने से भय जैसी स्थिति है उज्जैन की बात करें तो आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में जिलाधीश के निर्देश पर ब्लैक फंगस वार्ड अलग से बना दिया गया है जहां 18 से अधिक मरीज भर्ती है इन मरीजों में से तीन चार मरीजों के ब्रेन में यह फंगस पहुंच चुका है विशेषज्ञों की जानकारी के मुताबिक इनकी जान को खतरा बना हुआ है उज्जैन के चैरिटेबल अस्पताल में भी 4 मरीज ब्लैक फंगस के इलाज के लिए भर्ती है उज्जैन के एक होनहार युवक की कोरोना के बाद ब्लैक फंगस होने से इंदौर में मौत हो गई है। जानकारों का कहना है कि यदि इस रोग पर काबू नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में इस रोग से लोग मरेंगे इधर जिला प्रशासन ने इसे चैलेंज के रूप में लिया है कॉविड 19 के प्रभारी और शासकीय अस्पतालों के नोडल अधिकारी सुजान सिंह रावत ने बताया कि टीम बनाकर इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए शुरुआत की जा चुकी है उनके अनुसार इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को डॉक्टरों की एक टीम जिसमें डेंटिस्ट, ईएनटी स्पेशलिस्ट, आंखों का स्पेशलिस्ट और न्यूरो सर्जन के स्पेशलिस्ट हो की देखरेख में रखा जाना चाहिए इसके लिए जिला प्रशासन तैयारी कर रहा है शुरुआत में ब्लैक स्पॉट नजर आते ही इलाज शुरू कर दिया जाना चाहिए दवाइयों की किल्लत को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है क्योंकि इस तरह के रोगी को लगभग ₹40000 के इंजेक्शन प्रतिदिन लगाए जाते हैं यह कोर्स 30 दिन से 45 दिन का रहता है इसके अलावा बूस्टर इंजेक्शन भी इस रोग में लगाए जाते हैं अनुमान लगाए तो एक मरीज पर दवाइयों का ही लगभग 1500000 रुपए का खर्च आता है।

देश के कई हिस्सों में कोरोना संक्रमण से उबरने के बाद लोग म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस के मरीज बड़ रहे हैं। महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान जैसे राज्यों में इस खतरनाक संक्रमण की वजह से कई लोगों की जान जा चुकी है और अब उज्जैन में भी इस रोग ने अपने पैर पसारे हैं उज्जैन के एक युवा की इंदौर में इलाज के दौरान आज मौत भी हो गई है आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में भी इलाज के लिए पहुंची एक महिला की मौत हो गई है हालांकि वहां पहुंचे मरीज को ब्लैक फंगस था या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हो सकी, क्योंकि महिला के पहुंचने के चंद मिनटों में ही मौत होने से किसी भी प्रकार के की जांच नहीं करवाई जा सकी, इधर इस रोग से देशभर में बहुत से लोग अंधेपन का शिकार हो गए हैं। इस बीच सुजान सिंह रावत ने बातचीत में ब्लैक फंगस को लेकर कई अहम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने इसके लक्षण बताने के साथ यह भी सलाह दी है म्यूकोरमाइकोसिस से बचने के लिए क्या किया जाए और क्या नहीं।


एक से दूसरे में नहीं फैलता यह रोग

उन्होंने कहा, ''जागरूकता और जल्दी पहचान फंगल इन्फेक्शन को फैलने से रोक सकता है।'' उन्होंने बताया कि इम्यूनिटी जिसकी कमजोर होती है उसके शरीर में यह वायरस रहता है जिस व्यक्ति को ब्लैक फंगस हो जाता है उससे किसी दूसरे में संक्रमण नहीं फैलता है उन्होंने स्टेरॉयड का उपयोग करने को लेकर भी जरूरी सलाह देते हुए कहा कि इससे इम्यूनिटी कमजोर हो रही है। ऑक्सीजन पर जो मरीज है उनमें इस रोग के होने की संभावना है ज्यादा रहती है उन्होंने बताया कि हाई पावर कमिटी की एक मीटिंग इसी को लेकर आज हुई है और यह तय हुआ है कि तीन चार लोगों की टीम बनाकर काम करना पड़ेगा। शुरुआती लक्षण सामने आते ही इसे प्रारंभिक स्टेज पर रोकना ही सबसे बड़ी चुनौती है, वर्तमान में घर में उपचार मरीजों और अस्पतालों में भर्ती मरीजों को जो ऑक्सीजन पर है उनको लेकर बेहद सावधानियां बरतना होगी, इसके लिए गले , मुंह और दांत की सफाई के साथ-साथ बीटाडीन के गरारे भी किए जाना चाहिए। म्यूकोरमाइकोसिस को काबू करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं और इसके इलाज के लिए जरूरी दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में यदि मरीज का ऑपरेशन कर भी देते हैं तो उसके बाद लगने वाले इंजेक्शन उपलब्ध ना होने के कारण ऑपरेशन की कोई उपयोगिता नजर नहीं आती। 

क्या है म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस?

सुजान सिंह रावत ने बताया कि यह एक फंगल इन्फेक्शन है जो आमतौर पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित लोगों की पर्यावरणीय रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता को कम कर देता है। 

ऐसे लोग जो दूसरी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं या वोरिकोनाज़ोल थेरेपी ले रहे हैं, अनियंत्रित मधुमेह, स्टेरॉयड के अधिक इस्तेमाल से इम्युनिटी कमजोर होने या अधिक समय तक आईसीयू में रहने वाले मरीज फंगल इंफेक्शन के लिए संवेदनशील होते हैं।

 म्यूकोरमाइकोसिस से ग्रस्त लोगों के आंख या नाक के पास लाल निशान दिख सकते हैं या दर्द हो सकता है। इसके अलावा बुखार, सिरदर्द, कफ, सांस लेने में तकलीफ, खून की उल्टी और मानसिक संतुलन में बदलाव जैसे लक्षण हो सकते हैं। 


क्या करें, क्या नहीं?

इसके लिए डायबिटीज से ग्रस्त लोग यदि कोविड संक्रमित होते हैं तो डिस्चार्ज होने के बाद ब्लड ग्लूकोज लेवल पर नजर रखें। स्टेरॉयड का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक किया जाए। ऑक्सीजन थेरेपी के दौरान साफ और स्टेराइल वाटर का इस्तेमाल किया जाए। एंटीबॉयटिक और एंटी फंगल दवाओं का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके से किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज ना करें। नाक बंद होने के सभी केस को बैक्टीरियल साइनस ना समझें खासकर कोरोना मरीजों में। जांच कराने से ना हिचकें और इसके इलाज में देर ना की जाए।

इसलिए सर्वाधिक चिंता

रावत के मुताबिक कॉविड 19 में डेथ का परसेंट एक से दो पर्सेंट था लेकिन ब्लैक फंगस में अभी तक जो आंकड़े सामने आए हैं उनके मुताबिक डेथ रेट 50% तक है इसलिए इसे शुरुआती दौर में ही रोकना बहुत जरूरी है।


उज्जैन की युवक की इंदौर में हो चुकी है मौत


उज्जैन के एक युवक की ब्लैक फंगस के कारण आज सुबह इंदौर में मौत हो गई है जानकारी के मुताबिक युवक और उसकी पत्नी कॉविड 19 पॉजीटिव आने के बाद उज्जैन के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे वर्तनी पत्नी स्वस्थ होकर घर पहुंच गई लेकिन युवक अस्पताल से घर पहुंचने के बाद ब्लैक फंगस का शिकार हो गया उसे पहले तेजनकर अस्पताल में और फिर बाद में इंदौर के सीएचएल अस्पताल में भर्ती किया गया जहां उसकी एक आंख निकाल दी गई लेकिन ब्रेन में क्लॉटिंग होने से तबीयत बिगड़ती चली गई और आज सुबह उसकी मौत हो गई, परिवार में पत्नी , बेटा एक बेटी है ।युवक सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल का छात्र रह चुका है और एक टेलीकॉम कंपनी में उच्च पद पर आसीन था। मोहम्मद इमरान ने  करियर की शुरुआत में काफी समय तक Reliance-एयरटेल इंडिया में Manager/zsm रहे, अपने कुशल व्यवहार मिलनसारीता से इन्होंने अपनी एक अलग ही पहचान बनाई और वर्तमान में Idea/Vi में कार्यरत थे!

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