उज्जैन में संक्रमण दर कम आने पर,, होने वाले टेस्टों का पहली बार हमने किया ऑडिट,सामने आया सच ,,,,,,,,RTPCR से ज्यादा रैपिड एंटीजन टेस्ट,,,नतीजा संक्रमण दर घटकर 7.5% पर आ गई

 


उज्जैन ।18 मई को उज्जैन के हेल्थ बुलेटिन ने शहर की जनता को राहत की सांस लेने के लिए पर्याप्त आंकड़े सामने प्रस्तुत किए है। हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक 1990 जांच में मात्र 151 पॉजिटिव और 1839 नेगेटिव रिपोर्ट सामने आई। संक्रमण की दर घटकर 7.5 प्रतिशत पर आ गई। अचानक संक्रमण की दर जो 20, 18 ,16 और 14% थी,,,, 7.5 प्रतिशत आ गई, यह सब सच में हुआ या आंकड़ों की बाजीगरी या फिर टेस्टिंग की विधि को प्रभावित कर कर किया गया इसका सवाल जवाब ढूंढने के लिए जब आंकड़ों का विश्लेषण किया आश्चर्यजनक तथ्य सामने आए। 18 मई को कुल 1990 जांच की गई इनमें आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज और प्राइवेट लैब में मिलाकर RTPCR जांच 827 की गई, जबकि माधव नगर अस्पताल में आरटी पीसीआर जांच की सुविधा ना होने से वहां RAT अर्थात रैपिड एंटीजन टेस्ट 1163 लोगों का किया गया ।इनमें से सिर्फ 52 पॉजिटिव आए ।जबकि 864 जांच में 99 जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई,। सबसे पहले टेस्ट की पद्धति का ऑडिट करते हैं , कुल 1990 जांच में 864 जांच RTPCR पद्धति से की गई जिसका प्रतिशत 41 .5 5 है। 1163 जांच RAT पद्धति से किए गए जिन का प्रतिशत 58 पॉइंट 45 है। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के मुताबिक RAT 30% से अधिक नहीं होना चाहिए लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने अचानक रैपिड एंटीजन टेस्ट की संख्या बढ़ा दी है जिससे पॉजिटिव आने वालों की संख्या ऑटोमेटिक कम हो गई है । उज्जैन मैं भी 30% टेस्ट के मुकाबले 58.45 किए गए,, जो डब्ल्यू एच ओ की गाइडलाइन से लगभग दुगने है। यह संख्या दो कारणों से कम हुई है एक तो रैपिड एंटीजन टेस्ट पूरी तरह से कोरोना पॉजिटिव मरीज के लक्षणों को पकड़ने में कामयाब नहीं है, दूसरा कारण साफ है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट मैं पॉजिटिव मरीजों की संख्या बहुत कम आती है ।18 मई की जांच को ही आधार बनाएं तो माधव नगर अस्पताल में 1163 जांच में मात्र 52पोजिटिव सामने आए जबकि 864 जांच जो RTPCR पद्धति से की गई थी ,उसमें 99 मरीज पॉजिटिव आए। स्पष्ट है कि RATबढ़ाने से पॉजिटिव आने वाले मरीजों की संख्या ऑटोमेटिक कम हो जाती  है। रैपिड एंटीजन टेस्ट अधिक विश्वसनीय नहीं माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि कोरोना के लक्षण दिखाई दे रहे हैं और रैपिड एंटीजन टेस्ट में रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो मरीज को अपनी जांच फिर से RTPCR पद्धति से करवाना चाहिए।


कौन सा टेस्ट कराना चाहिए?


फिलहाल जांच के लिए अस्पताल खुद ही तय कर रहे हैं कि कौन सी जांच होनी चाहिए. जैसे मरीज अगर संक्रमितों के संपर्क में न आने का दावा करे तो उसका रैपिड एंटीजन टेस्ट होता है. इसमें रिपोर्ट जल्दी मिल जाती है. इसका रिजल्ट अगर पॉजिटिव आए तो संक्रमण कन्फर्म है. लेकिन निगेटिव आने और लक्षण महसूस होने पर RT- PCR कराया जाता है. इसकी रिपोर्ट में CT वैल्यू भी लिखी होती है, जिससे वायरल लोड का पता लगता है. अगर ये वैल्यू 24 से कम हो तो ठीक है लेकिन ये वैल्यू इससे ज्यादा हो तो मरीज का संक्रमण गंभीर स्तर पर पहुंच सकता है.

एंटीबॉडी टेस्ट किट-

 इस टेस्ट किट की मदद से इंसान के शरीर में कोरोना के खिलाफ मौजूद एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है. अगर किसी के शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी  मौजूद होगी तो इसका मतलब है कि उसके शरीर में वायरल प्रवेश कर चुका है. 

एंटीजन टेस्ट किट

 एंटीजन टेस्ट किट में वायरस के ऊपर मौजूद एक खास प्रोटीन का पता लगाया जाता है. इंसान के नाक और गले से लिए गए सैंपल की जांच में अगर टेस्ट किट में उस खास प्रोटीन का पता चलता है तो इसका मतलब है कि शरीर में कोरोना वायरस है. 

आरटी पीसीआर टेस्ट- 

आरटी पीसीआर टेस्ट में वायरस के डीएनए और आरएनए की जांच की जाती है. यह टेस्ट ज्यादा सटीक माना जाता है. हालांकि इसमें भी गलती के चांस हैं लेकिन यह टेस्ट काफी हद तक सटीक होता है. उक्त दो टेस्ट में गलत रिजल्ट आने के चांस भी रहते हैं. इस टेस्ट में समय ज्यादा लगता है और उक्त दोनों टेस्ट की रिपोर्ट आमतौर पर उसी दिन या अगले दिन तक मिल जाती है.

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