एट्रोसिटी एक्ट समाप्त करने व जातिगत आरक्षण को दस वर्षो के लिए पुनः वृद्धि के विरोध में महामहीम राष्ट्रपति महोदय के नाम ज्ञापन दिया

उज्जैन। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा द्वारा जातिगत आरक्षण व एट्रोसिटी एक्ट समाप्त करने व जातिगत आरक्षण को दस वर्षो के लिए पुनः वृद्धि के विरोध में महामहीम राष्ट्रपति महोदय के नाम ज्ञापन दिया गया।
यह जानकारी अ.भा. क्षत्रिय महासभा के शहर जिलाध्यक्ष कुं. बलवीर सिंह पंवार ने दी। आपने बताया की महासभा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री अंगदसिंह भदौरिया के नेतृत्व में राजपूत सरदार व क्षत्राणियों द्वारा कलेक्टर कार्यालय पहुंच कर जातिगत आरक्षण, एट्रोसिटी एक्ट व जातिगत आरक्षण को दस वर्षो हेतु पुनः वृद्धि के विरोध में ज्ञापन दिया गया।
ज्ञापन में कहा गया की जातिगत आरक्षण वर्तमान परिस्थितियो को दृष्टिगत रखते हुए पूर्णतः समाप्त किया जाना चाहिए। आरक्षण प्रतिभाओं को विकसित करने के स्थान पर उन्हें कुचलने का कार्य कर रहा है। शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के समय जातिगत आरक्षण से प्रवेश देने के बाद विद्यार्थीयों को समान शैक्षणिक वातावरण में शिक्षित होकर एक समान योग्यता रखने वाले विद्यार्थीयों को शासकीय सेवा, नौकरियों में आरक्षण क्यो ? जिन्हें जातिगत आरक्षण का लाभ देकर नौकरियों में भर्ती किया, नौकरियों के बाद प्रमोशन में आरक्षण क्यो? प्रमोशन में आरक्षण कदापि न्यायोचित नहीं है। देश की उच्चतम न्यायालय भी प्रमोशन में आरक्षण को असवैधानिक मान कर इसे पूर्णतः समाप्त करने का निर्णय दे चुकी है। किन्तु म.प्र. सहित कई प्रदेशो की सरकारें प्रमोशन में आरक्षण जारी रखने की गली निकालने में लगी है उच्चतम न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हुए प्रमोशन में आरक्षण पूर्णतः समाप्त किया जाना चाहिए।
अनुसूचित जाति, जनजाति सहीत सभी जाति सम्प्रदाय हेतू क्रीमिलेअर स्तर बनाना चाहिए, एक निश्चित आय निर्धारित की जाना चाहिए की इस मासिक आय से अधिक आय वाले व्यक्तियों के पुत्र-पुत्रियो व आश्रितों को किसी भी तरह की मुक्त शासकीय सुविधाए व आरक्षण का लाभ नही दिया जाना चाहिए। क्योंकि अनुसूचित जाति, जनजाति में भी जिन्हें आवश्यकता है व लाभ से वंचित है। ज्ञापन में कहा गया की अ.भा. क्षत्रिय महासभा सभी जाति, वर्ग व सम्प्रदाय के आर्थिक रूप से पिछडे, गरीब, शोषितों को न्याय दिलाने हेतू प्रतिबद्ध है जो इसके वास्तविक हकदार है उन्हें ही लाभ मिलना चाहिए। अतः सरकार को जातिगत आरक्षण समाप्त कर आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए।
श्री पंवार ने आगे बताया की इसी तरह अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निरोधक कानून भी समाप्त किया जाना चाहिए इस कानून के कारण समान्य व अजा वर्ग में वर्ग संघर्ष की स्थिति बढ़ती जा रही है सरकार ने मा. उच्चतम न्यायालय के आदेश को बदलने हेतू यह अध्यादेश पारित कर सामान्य वर्ग के हितों पर कुठारा घात किया है। अ.भा. क्षत्रिय महासभा एट्रोसिटी एक्ट का पूर्णतः समाप्त करने की मांग करती है।
            उल्लेखनीय है कि 10 जनवरी को देश के सभी जिला स्थानों पर जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपने अ.भा.क्ष. महासभा की राष्ट्रीय व प्रांतीय कार्यकारिणी के निर्णयानुसार उज्जैन में भी यह ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में देश के महामहीम राष्ट्रपति महोदय से मांग की गई वे जातिगत आरक्षण को समाप्त करने व इस ज्ञापन में उल्लेखित बातों को लागू करने हेतू देश की सरकार को दिशा दिर्नेश जारी करे। वर्तमान सरकार द्वारा जातिगत आरक्षण को पुनः दस वर्षो हेतू बढाए जाने का जो निर्णय लिया है उसे मंजूरी ना देकर मा. राष्ट्रपति महोदय सरकार को पुनः विचार हेतू दिशा - निर्देश जारी करे।
ज्ञापन देने वालो में अ.भा.क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री राजेश सिंह कुशवाह, संभागीय अध्यक्ष महेन्द्र सिंह बैस, संभागीय उपाध्यक्ष विजयसिंह भदौरिया कार्यकारी शहर जिलाध्यक्ष, उदयपाल सिंह सेंगर, युवा महासभा के प्रदेश प्रभारी शिवसिंह परिहार, प्रदेश मिडीया प्रभारी राजेन्द्र सिंह भदौरिया, संभागीय अध्यक्ष धर्मवीर सिंह भाटी, कार्यकारी अध्यक्ष राजेश सिंह भदौरिया , शहर जिलाध्यक्ष रामसिंह जादौन, महिला महासभा की प्रदेशाध्यक्ष उपमा चैहान, जिलाध्यक्ष राजकुमारी ठाकूर, संभागीय अध्यक्ष सुषमा पंवार व युवराज सिंह भैसौदा, बुद्धसिंह सेंगर, राजेन्द्र सिंह तोमर, अशोक सिंह गेहलोत, शारदा ठाकुर, रंजना राजपूत, चॉदनीसिंह, नीरा यादव, प्रमिला चैाहान आदि बडी संख्या में पदाधिकारीगण उपस्थित थे। कोठी पैलेस पर जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि एस.डी.एम. श्री संजय साहू ने ज्ञापन ग्रहण किया।


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