व्यंग्य को पाठकों तक ले जाने की जरूरत- बलदेव त्रिपाठी


उज्जैन व्यंग्य महोत्सव में हुआ पद्य, गद्य व्यंग्य पाठ
उज्जैन। किसी भी विधा में लिखने के पहले लेखक को वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को अनुभव करना चाहिए। व्यंग्य को आज सुदूर ग्रामीण अंचलों के पाठकों तक भी ले जाना चाहिए क्योंकि जिनके लिए व्यंग्य लिखा जा रहा है उन तक बात पहुंच नहीं रही है और केवल लेखक का लेखक के साथ ही संवाद हो रहा है।
ये विचार व्यंग्य यात्रा और शब्द प्रवाह के उज्जैन व्यंग्य महोत्सव में कथाकार बलदेव त्रिपाठी ने ’शिव शर्मा स्मृति व्यंग्य पाठ’ में अध्यक्षीय उद्धबोधन में व्यक्त किये। सत्र के विशेष अतिथि कृष्णकुमार आशु ने कहा कि आज व्यंग्यकारों को सुनकर लगा कि इक्कीसवीं सदी का व्यंग्य सही दिशा और दशा में जा रहा है। अतिथि रमेशचंद्र शर्मा ने कहा कि डॉ. शिव शर्मा एक प्रतिबद्ध व्यंग्यकार थे। व्यंग्य पाठ सत्र के अतिथि आशीष दशोत्तर, जयप्रकाश पांडे, रणविजय राव ने भी अपने विचार व्यक्त किये। व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय, शशांक दुबे, कमलेश व्यास कमल, प्रो. निखिल जोशी, डॉ रमेश चंद्र, सौरभ जैन, राजेन्द्र देवधरे दर्पण, देवेंद्र भारद्वाज, मुकेश जोशी, रमेश सैनी, रमाकांत ताम्रकर, सुनीता शानू, डॉ हरीश कुमार सिंह, अनिला चड़क, राजेश कुमार, रतन जैसवानी, ओम वर्मा, अशोक भाटी ने व्यंग्य पाठ किया। काव्य स्वर के सत्र की अध्यक्षता डॉ संजीव ने की। मुख्य अतिथि नीलांजना किशोर, स्नेहा देव थीं। विशिष्ट अतिथि डॉ देवेंद्र जोशी, लालित्य ललित, संदीप सृजन थे। कवि दिनेश दिग्गज, सिराज अहमद सिराज, संजीव कुमार, नीलांजना किशोर, स्नेहा देव, डॉ देवेंद्र जोशी, लालित्य ललित, संदीप सृजन, वंदना गुप्ता, पुष्पा चौरसिया, गड़बड़ नागर, अदिति सिंह भदौरिया, सौरभ चातक, राजेश रावल, सुषमा व्यास राजनिधि, ज्योति विश्वकर्मा, अनिला चड़क, सौम्या दुआ, कुमार सम्भव ने काव्य पाठ किया। व्यंग्य पाठ सत्र का संचालन पिलकेन्द्र अरोरा और काव्य सत्र का संचालन सुरेंद्र सर्किट ने किया। स्वागत लालित्य ललित ने और आभार डॉ हरीश कुमार सिंह ने व्यक्त किया।