जांच में सिद्ध हुआ कि,,,अश्लील वार्तालाप एवं नौकरी से निकालने की धमकी देने के आरोप असत्य, निराधार एवं मनगढ़ंत है
एसओईटी की चार महिला अतिथि विद्वानो का आवेदन निरस्त

 

उज्जैन ।  विक्रम विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीन्यरिंग एंड टेक्नालाजी की चार महिला अतिथि विद्वानो के आवेदन को माननीय न्यायालय (न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथन श्रेणी) ने खारिज/निरस्त कर दिया है। चार महिला अतिथि विद्वानो ने निदेशक डॉ॰ उमेश कुमार सिंह पर आरोप लगाए थे की निदेशक ने उन्हे मीटिंग मे प्रताड़ित किया था। उल्लेखनीय है की चार महिला अतिथि विद्वानो ने शिकायती आवेदन मे आरोप लगाए थे की दिनांक 04 फरवरी,2020 को संस्थान की स्टाफ मीटिंग मे निदेशक ने उन्हे प्रताड़ित किया। जिस मीटिंग का हवाला, अतिथि विद्वानो ने दिया उस मीटिंग मे अन्य 3 ओर महिलाए एवं 15 से अधिक पुरुष अतिथि विद्वान एवं कर्मचारी भी मौजूद थे। मामला संदेहास्पद होने के कारण पुलिस को जांच करना आवश्यक था, परंतु महिला अतिथि विद्वान जांच मे सहयोग नहीं कर रही थी एवं कथन देने से भी इंकार कर रही थी। महिला अतिथि विद्वानो द्वारा एफ़आईआर दर्ज करने का दबाब बनाया जा रहा था। क्योकि, इन लोगो का मकसद तो द्वेषतापूर्ण डॉ॰ सिंह के उपर पुलिस कार्यवाही करवाकर प्रताड़ित करने का था। अतः, शिकायत मे लगाए गए आरोप संदिग्ध होने के कारण एवं शिकायतकर्ता द्वारा जांच मे असहयोग करने एवं कथन नहीं देने के कारण, पुलिस द्वारा एफ़आईआर दर्ज नहीं की गई थी। इसके पश्चात इन अतिथि-विद्वानो ने माननीय न्यायालय (न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथन श्रेणी) मे भी अपना पक्ष रखकर एवं निदेशक डॉ॰ सिंह के उपर एफ़आईआर दर्ज करने के लिए आवेदन दिया। परंतु, माननीय न्यायालय द्वारा भी इन लोगो का पक्ष सुनकर इनका आवेदन निरस्त/खारिज कर दिया गया है।  


 


डॉ॰ सिंह के एडवोकेट श्री शेलेन्द्र सिंह परिहार ने बताया की दिनांक 4 फरवरी,2020 को मीटिंग मे अतिथि विद्वान डॉ॰ सिंह पर वर्क-लोड बड़ाने का दबाब बना रहे थे। अतिथि विद्वानो बहस कर रहे थे की निदेशक के कारण इनका 12000/- प्रतिमाह का आर्थिक नुकसान हो रहा है, अतः, अपनी अनुचित मांग की पूर्ति नहीं होने पर, महिला अतिथि-विद्वानो ने महिला थाने मे झूठी शिकायत कर दी। कतिपय शिकायतकर्ताओ एवं इनके साथी मे से अधिकांश के उपर झूठे शपथपत्र देने, नियम-विरूध्ध कार्य करने की शिकायते भी प्राप्त हुई थी। अतः, अपनी अनुचित मांगो के पूर्ण नहीं होने पर एवं प्राप्त शिकायतों पर संभावित कार्यवाही के डर से सभी लोगो ने आपस मे मिलकर/मिलीभगत कर निदेशक डॉ॰ सिंह को फसाने का षड्यंत्र रचा (Criminal Conspiracy with each other to seek undue advantages), षड्यंत्र को अंजाम देने के इरादे से, अपने मौलिक अधिकारो का दुरुपयोग कर (In pursuance of the said criminal conspiracy, they abused their rights with melafide intention), बाहरी तत्वो से मिलकर, दबाब बनाने के इरादे से सरकारी कार्य मे हस्तछेप करवाकर (in order to create pressure, they involved with external elements to interfere government work) दबाब बनवाया। जब इन लोगो का दबाब डाल कर कार्य नहीं हुआ तो इन लोगो ने महिलायों से महिला थाने मे निदेशक की झूठी शिकायत कर दी।


 


इसके पश्चात इन अतिथि-विद्वानो ने माननीय न्यायालय (न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथन श्रेणी) मे भी अपना पक्ष रखकर एवं निदेशक के उपर एफ़आईआर दर्ज करने के लिए आवेदन दिया। परंतु, माननीय न्यायालय द्वारा भी इन लोगो का पक्ष सुनकर इनका आवेदन निरस्त/खारिज कर दिया गया है।   


 


 “चूंकि निदेशक डॉ॰ सिंह द्वारा अतिथि-विद्वानो की अनुचित मांगे पूरी नहीं की गई, इसलिए बदले की दुर्भावना से एवं अनावश्यक दबाब बनाने के लिए झूठी घटना को रचा एवं डॉ॰ सिंह की झूठी शिकायत की गई है”। घटना के समय उपस्थित साक्षीयों ने भी अपने कथन मे कहा है की “जो घटना शिकायत मे बताई गई है, वह घटना हुई ही नहीं है एवं महिला अतिथि विद्वानो द्वारा अपने आवेदन पत्र मे निदेशक पर लगाए गए अश्लील वार्तालाप एवं नौकरी से निकालने की धमकी देने के आरोप असत्य, निराधार एवं मनगढ़ंत है।“


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