लक्ष्मी बाई की मौत से दहला उज्जैन,,, प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी प्रश्न चिन्ह लगा,,,,, हमारी खोजपूर्ण रिपोर्ट

उज्जैन। आखिरकार दानी गेट निवासी लक्ष्मी बाई की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई, रिपोर्ट आने के साथ ही यह तय हो गया कि वह प्रशासनिक बद इंतजामी के कारण और उचित इलाज न मिलने से मर गई,,,, प्रश्न उठता है कि आखिरकार लक्ष्मी बाई की मौत का जवाबदार कोन,,, क्या सचमुच उज्जैन में कोरोना के इलाज में घोर लापरवाही बरती जा रही है क्या,,,,सचमुच प्रशासन स्वयं को बेवस जैसी स्थिति में महसूस कर रहा है,,,, प्रस्तुत है हमारी तथयागत विशेष रिपोर्ट             कोविड 19 संक्रमण जब चारों तरफ कहर बरपा रहा है, ऐसे में उन मरीजों और उनके परिजनों की   शामत आ गई है जो जागरुकता और आर्थिक संसाधनों के कारण पिछड़े कहलाते हैं. तमाम सरकारी दावों के उलट उज्जैन में तो स्थिति ये है कि रोजाना कई कोरोना संदिग्ध मर्रीजों की भर्ती हो रही है पर उनकी जान बचाने का नाम पर उन्हें एक अस्पताल से दुसरे अस्पताल में फुटबॉल की तरह किक मारकर भेजा जा रहा है. खुद शासकीय माधव नगर अस्पताल, जिसे 25 मार्च को ‘कोविद-19 आइसोलेशन सेण्टर’ के रूप में बदल कर दिया गया था, वहां आज दिनांक तक दक्ष डॉक्टर व supporting टेक्निकल स्टाफ की पूर्ती नहीं की गई है. इन दुरावास्थाओं का ही ये परिणाम है कि निरीह मरीज जान से हाथ धो रहे हैं.
 शुक्रवार की सुबह RD Gardi Medical College located Agar Road में ५५-वर्षीय लक्ष्मी चौहान की सनसनीखेज मौत ने जैसे उज्जैन में कोरोना से लड़ने की शासकीय और मेडिकल व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है. दानीगेट इलाके में रहने वाली लक्ष्मीबाई के पति मूर्ति बनाने का काम करते हैं और उनके परिवार में 3 लड़की व 1 लड़का हैं. जिम्मेदार लोग अब भले ही कुछ भी स्पष्टीकरण दें, मगर लक्ष्मीबाई के जीवन और मौत के संघर्ष के कुछ पलों का जो विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है उससे इतना तो स्पष्ट हो गया है कि हालात कितने दयनीय हैं और संबंधितों की संवेदनाएं किस स्तर की हैं. 


 बकौल अशोक शिवहरे, जो मृतक लक्ष्मीबाई के साथ अंतिम समय तक थे, “अत्यधिक गंभीर अवस्था में आ जाने के कारण लक्ष्मीबाई को माधव नगर अस्पताल से सुबह-सुबह RD Gardi Medical College रेफ़र कर दिया गया था. बताया गया कि वहां बेहतर व्यवस्थाएं हैं और मरीज के बचने की संभावनाएं वहां ज्यादा हैं. उन्हें बाकायदा फोन करके बता भी दिया था कि मरीज को रेफेर कर दिया गया है. एम्बुलेंस के साथ ऑक्सीजन, स्टाफ नर्स आदि भी रवाना की गई थी. सुबह 7.45-8 बजे जब वहां पहुंचे तो कोई भी strature लेकर बाहर नहीं आया. वहां तब कोई स्टाफ भी नहीं था और अस्पताल में ताला लगा था. 25-30 मिनट बाद एक महिला कर्मी आई और कहा चूँकि icuमें ताला लगा है और स्टाफ भी नहीं आया है, तो ताला तोड़ दो और मरीज को अंदर ले आओ. हमने ताला तोडा और लक्ष्मीबाई को अंदर ले आए. तब तक एक डॉक्टर और एक स्टाफ नर्स भी आ चुके थे, मगर कुछ ही देर बाद मरीज ने दम तोड़ दिया. अगर RD Gardi Medical College में इस तरह की लापरवाहियां नहीं कि गई होती तो शायद लक्ष्मीबाई का जीवन बच जाता.” लक्ष्मीबाई को कोरोना संक्रमण जैसे symptoms के कारण अस्पताल लाया गया था,     
 इधर, हमारी टीम ने कोरोना संक्रमित संदिग्ध मरीजों के उपचार से सम्बंधित हालातों की पड़ताल की, तो हालात बदतर दिखाई पड़े. प्रशासन ने उज्जैन जिले में शासकीय माधव नगर अस्पताल व RD Gardi Medical College को क्रमशः ‘कोविद-19 आइसोलेशन सेण्टर’ और कोविद-19 मेडिकल इंस्टिट्यूट घोषित कर रखा है. सारे के सारे ‘गंभीर’ मरीज यहीं भर्ती किए जाते हैं. संदिग्ध मर्रीजों को quarantine home में भेजा जाता है, जो हामुखेडी और सुदामा नगर में बनाए गए हैं. शेष मरीजों को उनके घर में ही quarantined किया जाता है. 25 मार्च को शासकीय माधव नगर अस्पताल को ‘कोविद-19 आइसोलेशन सेण्टर’ घोषित किया गया था, मगर सूरत-ए-हाल ये हैं कि यहां intensivist की पोस्टिंग ही नही  कि गई है. एक डॉक्टर जो intensive care मेडिसिन में MD होता है, उसे आइसोलेशन वार्ड (ICU) में round-the-clock रहना होता है. जब कोई गंभीर मरीज admit होता है तो उसे वेंटीलेटर पर रखे जाने से पहले वेंटीलेटर में endotracheal tube  डालनी पड़ती है. जाहिर ये सब व्यवस्थाएं नहीं होने पर ही मरीज को यहां से RD Gardi Medical College रेफेर किया जाता है क्यूंकि वहां ये सब सुविधाएं उपलब्ध हैं. 
 अगर कोई कोरोना संक्रमित (संदिग्ध) मरीज शासकीय माधव नगर अस्पताल में आए और उसकी किस्मत फूटी हो तो फिर क्या कहने. कारण इस अस्पताल की स्थितियां इतनी भयावह हैं कि उनका कम शब्दों में वर्णन करना मुश्किल है. कहने को तो यहां पहले से ही 2 वेंटीलेटर उपलब्ध थे और administrative and health officials ने किसी तरह स्थानीय प्राइवेट हॉस्पिटल्स से 5 और वेंटीलेटर manage करे लिए हैं, पर इनको operate वाले technician ही नहीं हैं. इतना ही नहीं २९ मार्च को जब CHL Medical Center से बायो-मेडिकल इंजिनियर संजय सूर्यवंशी को वेंटीलेटर की जांच करने के लिए बुलवाया गया तो ICU में पदस्थ 4 ऑन ड्यूटी स्टाफ नर्स ने कोरोनो संक्रमित हो जाने के भय से ICU में जाने से ही इनकार कर दिया. लिहाजा उक्त बायो-मेडिकल इंजिनियर को बैरंग लौटना पड़ा.  
 वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर प्रशासन ने प्राइवेट अस्पतालों के 12 वार्ड assistants भी शासकीय माधव नगर अस्पताल में attach कर लिए हैं. इन्हें 8-8 घंटे की ड्यूटी पर हर रोज तैनात किया जात हैं, पर पता चला है कि इन सभी ने कोरोना के भय से रात कि shift में ड्यूटी करने से ही इनकार कर दिया है. ऐसे में मरीज को कोई complication हो जाए अथवा मशीनों में कोई technical problem उत्पन्न हो जाए तो बाद का हालातों के बारे में कल्पना ही की जा सकती है. 


 सूत्रों से ये भी पता चला ही कि वरिष्ठ प्रशासनिक और health ऑफिसियल मुहं दिखाई कर ही अपना फर्ज निभा रहे हैं. “ये लोग हमें दिन भर मोबाइल फोन करते हैं और निर्देश देते रहते हैं, लेकिन कोई समस्या बताओ अथवा उनसे किसी विषय में कार्रवाही करने को बोलो, तो वे कन्नी काट जाते हैं,” एक सीनियर डॉक्टर ने नाम ना छपने की शर्त पर बताया. लक्ष्मीबाई की मौत के बाद तो जैसे ‘बलि के बकरे; की खोज शुरू हो गई है, ये बात अलग है कि जिले के तीन जिम्मेदार अधिकारीयों ने मीडिया में खूब सुर्खियाँ बटोरी हैं पर उन्होनें आज दिनांक तक ‘कोविद-19 आइसोलेशन सेण्टर’ में जाकर झाँका तक नहीं है. 


  लक्ष्मी बाई पति अशोक दानी गेट उज्जैन की मृत्यु सांस लेने में तकलीफ के कारण हुई
 
 उज्जैन 4 अप्रैल .उज्जैन के दानी गेट निवासी लक्ष्मी बाई पति अशोक आयु 55 वर्ष की मृत्यु सॉस लेने में तकलीफ के कारण हुई है। उक्त महिला का कोरोनावायरस से प्रभावित होना संदिग्ध पाया गया जिसके  कारण  उनकी जांच के लिए  सेम्पल भेजा गया  था ।इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है
      स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि उक्त महिला 2 अप्रैल को रात्रि 7:00 बजे जिला  अस्पताल में भर्ती हुई, 3 अप्रैल को सुबह 1.30 बजे उक्त मरीज के रक्त में ऑक्सीजन की कमी देखी गई इसके मद्देनजर उक्त महिला को माधव नगर अस्पताल में सुबह तीन बजकर बत्तीस मिनट पर भर्ती किया गया ।माधव नगर अस्पताल  में  वेंटीलेटर  का परिचालन व्यवस्थित नहीं हो पाया इस कारण  मरीज को सुबह 7:00 बजे  आर डी   गार्डी  मेडिकल कॉलेज भेजा गया क्योंकि लक्ष्मी बाई की कोरोना  वायरस की रिपोर्ट नहीं आई थी इस कारण उक्त महिला को कोरोनावायरस  अन्य  मरीजों के साथ वार्ड में नहीं रखना था। उनको आइसोलेशन के अलग वार्ड में जिसमें ऑक्सीजन लाइन तथा वेंटिलेटर की व्यवस्था   आर डी  गार्डी  मेडिकल कॉलेज द्वारा की गई थी में  रखना था। किंतु  महिला के परिजन आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा कर्मियों की यह बात घबराहट एवं शोर-शराबे में नहीं सुन पाए और उन्होंने अस्पताल के आईसीयू जहां चार कोरोनावायरस के मरीज  भर्ती थे का  गेट का ताला तोड़ दिया ।जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसी दौरान उक्त महिला की 3 अप्रैल को प्रातः 7:50 पर मृत्यु हो गई ।
 
    कलेक्टर शशांक मिश्र द्वारा उक्त महिला के माधव नगर अस्पताल  में उपचार के दौरान लापरवाही को लेकर सख्त कदम उठाते हुए माधव नगर के प्रभारी एवं सिविल सर्जन के विरुद्ध कार्रवाई की गई तथा प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए गए हैं ।


मृतक लक्ष्मी बाई पति अशोक दानी गेट उज्जैन की  रिपोर्ट    कोरोना पॉजिटिव  आई


 उज्जैन के दानी गेट निवासी लक्ष्मी बाई पति अशोक आयु 55 वर्ष की मृत्यु  3  अप्रैल  को सॉस लेने में तकलीफ के कारण हुई थी ।  उक्त महिला की   रिपोर्ट  कोरोना  पॉजिटिव  आई  है ।



        कलेक्टर  श्री  शशांक  मिश्र ने  बताया  कि  उक्त  मृतक महिला के संपर्क में जो भी व्यक्ति रहा हो वह सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग को अथवा टोल फ्री नंबर 104 पर फोन कर सूचित करें तथा स्वयं को होम आइसोलेशन में रखें । होम आइसोलेशन अर्थात घर में रहकर परिवार के अन्य लोगों के संपर्क में न रहें एवं अलग से किसी एक कमरे में रह कर रहे । साथ ही सर्दी ,खांसी ,बुखार अथवा कोरोनावायरस  के  लक्षण पाए जाने पर तुरंत 104 नंबर पर सूचित करें अथवा स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करें .