'खौफ" के साए में भी सेवाधाम में मानव सेवा का जज़्बा कायम

उज्जैन।कोरोना काल,,,,,,, में एक और जहां अपनों की लाश भी लोग छूने से डर रहे हैं ,सामाजिक रिश्ते भी तार तार हो रहे हैं, कहीं बाप की लाश को बेटा हाथ नहीं लगा रहा है ,तो कहीं मां की मौत पर बेटा शमशान जाने से डर रहा है


 डर का ऐसा मंजर,,,,,,, पिछले 100 साल में कभी नहीं देखा गया । ऐसी विकट स्थिति में सेवाधाम ने एक विक्षिप्त को उसके अबोध बेटे के साथ अपनाकर यह जता दिया कि मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है।              सेवाधाम आश्रम 32 वर्षों से अत्याचार, दुराचार से पीड़ित-शोषित विवाहित-अविवाहित महिलाओं और उनके बच्चों को अपना रहा है। सम्पूर्ण लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए आश्रम के तीनों द्वार तालाबन्दी की जद में है। इस दौरान मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ भारत के अनेक राज्यों से प्रवेश की 100 से अधिक सूचनाऐं प्राप्त हुई और दबाव भी बना किन्तु आश्रम ने एक भी प्रवेश नही दिया किन्तु 35 वर्षीय मानसिक विक्षिप्त महिला और 6 माह बच्ची को एसडीएम खाचरौद विरेन्द्र सिंह डांगी ने खाचरौद में लावारिस घूमते हुए देखकर उनका दिल पसीजा और उन्होंने सुरक्षित आवास के लिए कई प्रयास किये किन्तु सफलता प्राप्त नही हुई ऐसी स्थिति में उन्होंने सेवाधाम आश्रम के संस्थापक सुधीर भाई गोयल से सम्पर्क किया तत्पश्चात उसकी दयनीय स्थिति को समझकर संस्थापक के निवेदन पर एनआरसी केन्द्र खाचरौद में उक्त विक्षिप्त महिला एवं नवजात बच्ची को 20 दिन से अधिक की अवधि के लिए क्वाराईटिन किया। समस्त स्वास्थ्य परीक्षण उपरांत लॉकडाउन अवधि में उक्त महिला व बच्ची को पुलिस के माध्यम से स्वीकार किया। उक्त विक्षिप्त महिला कभी बिहार तो कभी उत्तरप्रदेश की बताती है। उक्त महिला को आश्रम संस्थापक व कांता भाभी ने आश्रम की परम्परानुसार मंगल तिलक, माला एवं मिष्ठान्न खिलाकर प्रवेश दिया गया। उक्त जानकारी देते हुए समन्वयक मोनिका-गौरी गोयल ने बताया कि इसी प्रकार आत्महत्या के लिए मजबूर वैश्य समाज के 76 वर्षीय वृद्ध को अपनाकर पुनर्वसन किया गया।


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