RD GARDI का काला सच सामने आया, शहर में कोरोना फैलाने का गंभीर अपराध, मौत होने पर जिसे नेगेटिव बताया, उसे बाद में पॉजिटिव बताकर अंतिम संस्कार करने वालों की जान आफत में डाली

 


उज्जैन।कल देर रात आई 23 पॉजिटिव रिपोर्ट में से सबसे ज्यादा चौंकाया अब्दालपुरा के भार्गव परिवार की 2 पॉजिटिव रिपोर्ट ने ,क्योंकि इस परिवार के मुखिया की मौत के पहले और मौत के बाद आई अलग-अलग रिपोर्ट के कारण परिवार आफत में आ गया है ।मौत के पहले नेगेटिव आने और मौत के बाद पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद परिवार को सुपुर्द की गई लाश सबसे ज्यादा चौंकाने वाली है क्योंकि यदि रिपोर्ट नेगेटिव थी तो लाश को कोरोना मौत की तरह पैक क्यों किया गया ? और यदि पैक भी किया गया तो फिर उसे अन्य लोगों को संक्रमित करने के लिए अंतिम संस्कार से पहले मुंह क्यों खोला गया ? आरडी गार्डी भले ही अब यह कहे कि हमने तो जो जांच रिपोर्ट आई उसे ही परिवार को बताया । तो फिर सवाल यह भी है की अलग-अलग रिपोर्ट आने से  आरडी गार्डी मेडिकल अपनी जिम्मेदारी से कैसे बच  सकता है ? डर इस बात का  है कि ना जाने कितने लोग संक्रमित और होंगे जो सामने नहीं आए।
 40000000 रुपए प्रतिमाह वसूलने के बाद भी आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज न सिर्फ लाशें उगल रहा है बल्कि कोरोना से हुई मौतों को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट दी जा रही है, उसके इस अपराध की सजा कौन देगा? यह तो तय नहीं है लेकिन अब यह तय हो गया है कि आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज न सिर्फ कोरोना के मरीजों को मार रहा है बल्कि कोरोनावायरस फैलाने में अपनी अहम भूमिका अदा भी कर रहा है । ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जिससे सुनने वालों के रेंगटे खड़े होना स्वभाविक है, देर रात हेल्थ बुलेटिन में 23 नए लोगों को कोरोनावायरस संक्रमित बताया गया, इनमें से दो संक्रमित अब्दाल्पुरा क्षेत्र में रहने वाले भार्गव परिवार से भी हैं, इनमें से एक डेढ़- 2 साल की मासूम बिटिया भी है जबकि एक महिला भी इसकी चपेट में आ गई, यह दोनों संक्रमित आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज की देन है, जानकारी के मुताबिक 3 दिन पहले इसी परिवार के 62 वर्षीय  श्री निरंजन भार्गव की मृत्यु हो गई थी मृत्यु के बाद परिवार वालों को बताया गया कि यह मृत्यु कोरोना के कारण नहीं हुई है, परिणाम स्वरूप उन की शव यात्रा में लगभग 20 लोगों ने हिस्सा लिया, शव यात्रा से लौटने के बाद अगले दिन इस परिवार को बताया गया कि श्री भार्गव कोरोना से संक्रमित थे, जैसे ही यह जानकारी उनके परिवार को दी गई परिवार सकते में आ गया, परिवार में शामिल एक अधिवक्ता के परिवार ने जांच कराने से इंकार कर दिया जबकि श्री निरंजन भार्गव के दो बेटों ने स्वयं आगे रहकर जांच करवाई जिससे परिवार में दो लोगों को संक्रमण निकला इनमें से एक डेढ़ -2 वर्ष की मासूम बेटी भी है, जबकि ऐक मृतक की बहू है। सवाल यह उठता है कि जब श्री भार्गव को नेगेटिव बता गया तो फिर अचानक उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव कैसे हो गई, निश्चित तौर पर अब यह तय हो गया है कि आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज मैं होने वाली जांच संदेह के घेरेे में  है, मरीजों की मृत्यु को भी छुपा कर शहर में कोरोनावायरस फैला रहा है, पहले इसी कालेज के डॉक्टर महाडिक  ने भी यही अपराध किया और अब लाशों की गिनती  में वृद्धि को रोकने के लिए इस तरह के संगीन अपराध किए जा रहे हैं,  क्योंकि इसी परिवार के एक हिस्सा ने अभी भी जांच नहीं करवाई है, हो सकता है कि जांच  न करवाने वालों  में भी किसी को कोरोना हो। आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज द्वारा किया गया यह अपराध किसी भी स्थिति में क्षमा योग्य नहीं है, आखिर शासन क्यों इस हत्यारे अस्पताल को संरक्षण दे रहा है। समाचार में प्रकाशित जानकारी भार्गव समाज के एक वरिष्ठ व्यक्ति से बातचीत के आधार पर                                              दैनिक मालव क्रांति ने आरडी गार्डी कॉलेज के नोडल ऑफिसर डॉक्टर सुधाकर से बात की तो उन्होंने बताया कि पहले रिपोर्ट नेगेटिव आई थी लेकिन बाद में पॉजीटिव आई, ऐसा कैसे हुआ इस प्रश्न के जवाब में उन्होंने बताया कि इसमें हम क्या कर सकते हैं लेबोरेटरी से जो जांच रिपोर्ट हमें प्राप्त हुई हम तो वही बता सकते हैं।


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