कोरोना काल का भयावह सच,,,,,,, रिपोर्ट पॉजिटिव फिर भी अंतिम संस्कार लकड़ी -कंडे जलाकर किया ,,,,,,,, आरडी गार्डी को स्वयं अपनी जांच रिपोर्ट पर भरोसा नहीं,,,,,,

उज्जैन।कोरोना मृत्यु के रहस्य को जानने के लिए अलग-अलग विभागों से अनेक जानकारियां एकत्र करने के बाद जब उनका विश्लेषण किया तो एक नहीं अनेक चौका देने वाले मामले सामने आए, जिससे यह आशंका बलवत होने लगी की कोरोना से संबन्धित जानकारी को लेकर कहीं कोई आंकड़ों का तिलिस्म तो नहीं बुना जा रहा है? जनहित में ये समझने की की कोशिश की कि कहीं किसी योजना के तहत उज्जैन की ‘सर्वाधिक मृत्यु दर’ वाली स्थिति को देश की औसतन ‘मृत्यु दर’ वाली स्थिति स्थापित तो नहीं किया जा रहा है?  


उदाहरण पेश है:-


 उज्जैन के अबदलपुरा निवासी एक 62 साल के पुरुष की मृत्यु से जुड़ा संदर्भ भी रोंगटे खड़े कर देने वाला है। प्रशासन का रेकॉर्ड कहता है कि उक्त मरीज को 7 मई को आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया। उसी दिन खांसी और कफ़्फ़ की शिकायत पर उनका स्वाब लिया गया, जिसकी रिपोर्ट 8 मई की शाम 6.37 बजे आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज की लैबोरेटरी से प्राप्त हुई जिसमें उन्हें पॉज़िटिव प्रकरण माना गया। 8 मई को ही उक्त मरीज की मृत्यु भी हुई। ऐसे में शंका के बादल आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज को घेर लेते हैं! उसका रेकॉर्ड बताता है कि उक्त मरीज को 4 मई को भर्ती किया था और 8 मई की दोपहर 3.50 बजे उनकी मौत हो गई। चिकित्सकीय प्रमाण-पत्र में उनकी मृत्यु का कारण फिर किस आधार पर “कोरोना नेगेटिव डैथ” बता दिया गया? आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियाँ निर्मित हुईं कि आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के उक्त चिकित्सक को अपने ही कॉलेज की लैबोरेटरी की रिपोर्ट को झुठलाना पड़ा? जिला प्रशासन भी यहाँ खुद-ब-खुद शंका के दायरे में आ रहा है। शासन द्वारा आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज की जिस लैबोरेटरी को कोरोना टेस्टिंग लैबोरेटरी की अधिकृत सूची में शामिल किया गया है और समूची टेस्टिंग किट उपलब्ध कराने के बाद प्रति टेस्टिंग पर 1500 रुपए दिए जा रहे हैं, तो उसी हॉस्पिटल द्वारा स्वयं की रिपोर्ट को क्यों खारिज किया गया? जब उक्त हॉस्पिटल अपनी ही जांच रिपोर्ट को अस्वीकार कर रहा है, तो जिला प्रशासन आखिर क्यों उसे स्वीकार कर रहा है? इसके इतर ये प्रश्न भी मौजूं है कि उनका अंतिम संस्कार कोरोनो प्रोटिकोल के तहत क्यों नहीं किया गया ? आखिर उस दौर में ऐसी कौन-सी शक्तियाँ प्रभावी थीं, जिनके चलते उक्त कोरोना पेशंट का अंतिम संस्कार कंडे व लकड़ी जलाकर अलग प्लैटफ़ार्म पर किया गया? जिम्मेदार लोगों के कान इसलिए भी पकड़े जाएंगे कि उक्त कोरोना पेशंट का अंतिम संस्कार सामान्य रीति-रिवाज से कराने के कारण उनके परिवार के दो सदस्य बाद में कोरोना से संक्रमित होकर जिस तरह परेशान हुए, उसका उनके पास क्या जवाब है...?


फ़ैक्ट फ़ाइल


(1) 05 मई के बाद उज्जैन में स्थितियाँ विचित्र हो चलीं थीं। शहर के तथाकथित लोकप्रिय विधायकगण आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के पक्ष में चले गए। उनकी बात मानकर मुखी मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी संतुष्ट भाव में आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज को बार-बार अच्छाई का सर्टिफिकेट जारी करने लग गए। नया प्रशासन तो तैयार था ही, उसने तुरंत ताल ठोंकना शुरू किया कि अब सब कुछ नॉर्मल हो गया है! ये बात अलग है कि इन्हीं में से एक विधायक ने ख़ासी-जुखाम होने पर अपने अग्रज भाई और फिर उनकी पत्नी को बकायदा आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया और बाद में रातों-रात औरबिंदो, इंदौर में शिफ्ट करवा दिया!


 


(2) ‘नए कलेक्टर आशीष सिंह ने भी  ताबड़तोड़ औरबिंदो, इंदौर में उज्जैन ज़िले के कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए 100 बेड और फिर अमलतास, देवास में 300 बेड्स रिजर्व करवा दिए। इससे पहले आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में उज्जैन ज़िले के कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए 500-800 बेड्स रिजर्व करने के नाम पर करीब 4 करोड़ प्रति माह की बात हो ही चुकी थी!


 


(3) इन गोरखधंधों की पोल उस समय खुलना शुरू हो गईं जब आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में ही लगातार कोरोना मरीजों का उपचार कर रहे एक डॉक्टर ने जब खुद को कोरोना संक्रमित पाया तो वे औरबिंदो, इंदौर की शरण में चले गए!


 


(4) बड़नगर के काँग्रेस विधायक मुरली मोरवाल और उनके युवा पुत्र ने भी आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज की टेस्टिंग लैबोरेटरी रिपोर्ट को अमान्य कर दिया और बाद में बकायदा औरबिंदो, इंदौर का सर्टिफिकेट लाते हुए खुद को कोरोना नेगेटिव घोषित कर दिया!