कोरोना से मरने वालों की अजीबोगरीब कहानी,,,,,,,,जिसे आरडी गार्डी ने निगेटिव बताकर डिस्चार्ज किया, अगले दिन उसकी मौत हो गई,,प्रशासन ने कोरोना मौत माना,,,,,,,, जिसकी मौत बिड़ला अस्पताल में हुई , उसे आरडी गार्डी अपने अस्पताल में मरना बता रहा है

उज्जैन।कोरोना से मरने वालों की अधिकृत सूची के मुताबिक उज्जैन में अब तक 71 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है, यह सभी मौत अलग-अलग अस्पतालों में हुई है और बकायदा प्रशासन ने इन अस्पतालों के नाम भी अपने सूची में शामिल किए हैं , लेकिन इस सूची को भी पूर्णत: इसलिए विश्वसनीय नहीं माना जा सकता क्योंकि उसमें भी कई चौंकाने वाले हेर-फेर किए गए हैं! इनमें दो प्रकरण ऐसे सामने आए है ,जिन्हें जानकर कोई भी आश्चर्य में पड़ सकता है। एक प्रकरण में जिसे प्रशासन ने कॉविड डैथ माना उस महिला को महज तीन दिन में अस्पताल से कोविड-19 नेगेटिव बता कर डिस्चार्ज कर दिया गया। अगले ही दिन महिला की मौत उसके घर पर हो गई लेकिन प्रशासन ने उसे अस्पताल में ही मरना बताया। हैरत में डालने वाली बात ये है कि अस्पताल ने इस बात से इंकार कर दिया कि उक्त मरीज की मौत उसके यहाँ हुई और वो कोरोना संक्रमित थी। दूसरे मामले में एक महिला की कोरोना मौत उज्जैन शहर के एक नॉन-कोविड हॉस्पिटल में जिस दिन होना बताई गई, उसकी मृत्यु का सर्टिफिकेट ग्रामीण क्षेत्र में स्थित एक अस्पताल ने जारी किया, मगर उसकी मौत की तारीख दूसरी बताई गई।    


 कामदारपुरा, केडी गेट निवासी 55 साल की एक महिला को 16 अप्रैल को माधव नगर हॉस्पिटल में भर्ती किया था, जहां से रात दो बजे के लगभग उन्हें आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेडीकल बुलेटिन के अनुसार उक्त महिला की मौत 20 अप्रैल को आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में सुबह 6 बजे हो गई। इसके विपरित आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज ने उक्त मौत को कोरोना डैथ नहीं माना और तो और उसने ये भी मानने से इंकार कर दिया की उक्त महिला की मौत उसके अस्पताल में हुई। इसीलिए चिकित्सकीय मृत्यु प्रमाण-पत्र भी जारी नहीं किया गया। उधर मृतिका के पुत्र ने संपर्क करने पर हमें बताया कि आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में तीन दिन भर्ती रहने के बाद कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव बताते हुए उसकी माँ को 19 अप्रैल की शाम 6 बजे डिस्चार्ज कर दिया गया था। डिस्चार्ज के दूसरे दिन यानी 20 अप्रैल को महिला की मौत उसके घर पर हो गई और वहीं से बकायदा उनका जनाजा भी निकाला गया। जिला प्रशासन की सूची में उक्त महिला की कोरोना डैथ सीरियल नंबर 11 पर दर्ज है। बाद में उक्त परिवार की एक महिला सदस्य भी कोरोना संक्रमित पाईं गईं। इस मामले में आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज का प्रबंधन कटघरे में है क्योंकि कोरोना काल के समय मात्र 3 दिन में ही महिला को नेगेटिव बता कर डिस्चार्ज कर देना और फिर बाद में उसकी मौत हो जाना, निश्चित तौर पर बड़ी लापरवाही है,सवाल यह भी हैं कि कोरोना काल के पीक दिनों में आखिर एक कोरोना पोजीटिव मरीज को मात्र तीन दिन में ही कोरोना नेगेटिव बताते हुए डिस्चार्ज कैसे कर दिया गया? यह मामला अधिकृत सूची की कलाई इस कारण भी खोलता है कि आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज ने डिस्चार्ज सर्टिफिकेट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया है कि उक्त मृतिका को अगले 14 दिनों तक होम कोरनटाइन में रहते हुए क्या ट्रीटमंट लेना है। ये एक गंभीर सवाल है कि अधिकृत सूची में भोपाल की जिस बीएमएचआरसी लेेब की रिपोर्ट के आधार पर उक्त महिला की मृत्यु को कोरोना डैथ माना गया है, तो फिर आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज ने किस रिपोर्ट के आधार पर उक्त मरीज को कोरोना नेगेटिव बता दिया और बाले-बाले डिस्चार्ज भी कर दिया? और मिहिला के घर पर होने वाली मौत को अपने अस्पताल में होना बताया। इधर              


खजूरवाली मस्जिद निवासी एक 38 साल की महिला की मौत को यों तो कोरोना डैथ की अधिकृत सूची में शामिल किया गया है, पर इस मामले से संबन्धित दस्तावेज़ भी कम चौका देने वाले नहीं है,उक्त मरीज को 20 अप्रैल को ‘सांस लेने में तकलीफ के कारण’ बिड़ला हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। उनका सैंपल भोपाल के निषाद लैब में भेजा गया था। 23 अप्रैल को उनकी कोरोना रिपोर्ट पोजीटिव आई। मगर इसी बीच 21 अप्रैल को बिड़ला हॉस्पिटल में ही उनकी मौत हो गई। बिड़ला हॉस्पिटल उज्जैन में है, मगर उनकी मृत्यु का सर्टिफिकेट उज्जैन नगर निगम की सीमा से बाहर स्थित आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज ने जारी कर सबको चौंका दिया, फॉर्म नंबर-14 (A) में चिकित्सकीय प्रमाण-पत्र में उसकी मृत्यु का तात्कालिक कारण ‘कार्डियो रेस्पिरेटरि अरैस्ट’ दर्शाया गया है। उन्होने उनकी मृत्यु 22 अप्रैल को क्यों बताई? यह सवाल अनुतरित है, जिस मरीज को जिला प्रशासन ने बिड़ला हॉस्पिटल में 21 अप्रैल को मरना बताया, वो कैसे 22 अप्रैल को आरडी गार्डी मेडिकल में भर्ती हो गई?और वहा उसे मरना भी बता दिया गया। इन 2 प्रकरणों के सामने आने के बाद कोरोना क़ाल मैं होने वाली मौतों को लेकर सवाल खड़े होना लाजिम है।


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