फर्जी रसीद,,,,की फर्जी कहानी ?,,,,,बड़ा सवाल ?नगर निगम की रसीदों से क्या प्रिंटिंग प्रेस वाला वसूली करता!,,,,, मास्टर माइंड सामने आना चाहिए

उज्जैन ।नगर निगम की फर्जी चालान रसीदों का एक सनसनीखेज फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस फर्जीवाड़े की पूरी कहानी सुनकर सुनकर स्पष्ट हो जाता है कि शहर में एक बड़ा गिरोह कोरोना काल मैं खुलेआम लाखों की डकैती की योजना बना रहा था, संभावना यह भी है कि गिरोह ने अब तक कोरोना के नाम पर शहर के भोले भाले नागरिकों को डरा धमकाकर लाखों की वसूली की होगी, जिस तरह अब पूरे मामले में माधव नगर थाना प्रभारी प्रेम नारायण लिखा हुआ बयान पढ़ रहे हैं उससे साफ जाहिर है कि गिरोह के सदस्यों को पकड़ने के इरादे नजर नहीं आ रहे हैं, प्रिंटिंग प्रेस में ऑर्डर देने वाले व्यक्ति को जयपुर निवासी बताना और प्रेस वाले द्वारा यह कहना कि ऑर्डर किसके द्वारा दिया गया था उसकी जानकारी उसे नहीं है यही इस बात का प्रमाण है कि पूरे मामले को दबाया जा रहा है, कोरोना काल में फर्जी रसीदों के माध्यम से खूब लूटा होगा, और आगे भी लूटने की बड़ी योजना बनाई जा रही थी, लेकिन जिस तरह प्रिंटिंग प्रेस मालिक को धारा 419 और 420 में गिरफ्तार किया है और जिस तरह प्रारंभिक बयान सामने आए हैं उससे लगता है कि नगर पालिक निगम की बड़ी गैंग को बचाने के रास्ते ढूंढे जा रहे हैं। उज्जैन में कोरोना काल में प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर नगर निगम के माध्यम से ऐसे लोगों के चालान बनाए जा रहे थे जो सरकारी गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे हैं लेकिन चालान में जिन रसीद कट्टो का उपयोग किया जा रहा था वह फर्जी होने की आशंका बन गई है।


दरअसल उज्जैन नगर निगम के अधिकारी सुबोध जैन फ्रीगंज में एक वाइंडिंग की दुकान पर रसीद कट्टे की वाइंडिंग होती देख दंग रह गए । उन्होंने पूछा कि यह वाइंडिंग किसने करवाई है ,तो वाइंडिंग करने वाले बोहरा व्यापारी ने कहा कि फ्रीगंज की छपाई प्रिंटिंग चलाने वाले विकास नमक युवक ने उन्हें काम दिया है। इस बात की जानकारी सुबोध जैन वरिष्ठ अधिकारियों को दी । इसके बाद पड़ताल शुरू हुई तो पता चला की रसीद कट्टे फर्जी थे। इस खबर ने पूरे नगर निगम में हड़कंप मचा दिया।


राजस्व विभाग के अधिकारियों ने आपातकालीन बैठक बुलाई है। आशंका है कि कोरोना काल में उज्जैन में लाखों रुपए की फर्जी रसीद काटी गई है। इस पूरे मामले को लेकर जांच के आदेश हो गए हैं । बताया जाता है कि विकास और वाइंडिंग करने वाले को हिरासत में ले लिया गया है। हालांकि विकास की इतनी गलती जरूर थी कि उसने प्रिंटिंग की ऑर्डर देने वाले का नाम और मोबाइल नंबर नहीं लिया था, ऐसा उसने बताया, लेकिन विकास का यह बयान पूरी तरह फर्जी और दबाव में आ कर दिया है ऐसा लगता है क्योंकि शहर में एक भी प्रिंटिंग प्रेस ऐसी नहीं है जो बगैर एडवांस के और सरकारी मामला होने पर बगैर किसी अधिकृत आर्डर के प्रसिद्ध करते प्रिंट करें,,हालांकि अब उसको ढूंढने का नाटक किया जा रहा है जिसने प्रिंटिंग करने का आर्डर दिया था।


अगर कोरोना काल में आपका भी कोई फाइन हुआ है तो आप अपनी रसीद को संभाल कर रखिए । हो सकता है कि आपके हाथ फर्जी रसीद आ गई हो। अगर ऐसा होता है तो पूरा घोटाला कितनी राशि का हुआ है यह उज्जैन की जनता तय कर देगी। फिलहाल प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच शुरु करवा दी है। अधिकारी कोई आधिकारिक बयान नहीं दे रहे है लेकिन इतना जरूर है कि घोटाला लाखों में निकल सकता है। पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल,,,की क्या प्रिंटिंग प्रेस वाले की इतनी ओकात थी की वह फर्जी रसीद छाप कर खुद गैंग बनाकर वसूली कर लेता,,,,यदि इस सवाल का जवाब नहीं में है तो फिर यह सामने आना चाहिए की इन रसीदों से वसूली करने वाला मास्टर माइंड कहा है, और कोन है