रेड सैंड बोआ एवं सुनहरा उल्लू वन्यजीव के तस्करो की जमानत निरस्त

न्यायालय माननीय संकर्षण पाण्डेय, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जिला उज्जैन के न्यायालय द्वारा अभियुक्तगण 01. मुकेश, 02 मनोज, 03 वैभव, 04. रेखा, 05. रश्मी, 06 चेतन, 07. सुधा, 08 नीलिमा, 09. करण, 10 राजकुमार अभियुक्तगण का जमानत आवेदन निरस्त किया गया।


उप-संचालक (अभियोजन) डॉ. व्यास ने अभियोजन की घटना अनुसार बताया कि दिनांक 20.07.2020 को 10 वन्यजीव तस्करो को एसटीएफ पुलिस उज्जैन ने वन्यजीव तस्करी मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया था, अभियुक्तगण से एक रेड सैंड बोआ (दो मुहा सांप, चकलोन ) और सुनहरा उल्लू दुलर्भ प्रजाति के बरामद किये गए थे। अभियुक्तगण से जप्त दो मुंह के सांप का वजन लगभग सवा 6 किलो है, पुलिस ने अभियुक्तगण से एक टाटा टियागो कार नंबर एम.पी. 09 डब्लू डी 1151 और वेगनआर नंबर एमपी 09 सीजे 4370 भी जप्त की है। अभियुक्तगण में 6 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल है। दो मुंहे सांप और उल्लू की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग तीन से चार करोड़ रुपए है, एवं उक्त वन्य प्राणी दो मुॅह वाला सांप मेडिसिन बनाने के काम आता है और उल्लू को तंत्र क्रिया में उपयोग किया जाता है। एसटीएफ ने गिरफ्तारी के बाद मामला वन विभाग को सौंपा था। उल्लू वन्यप्राणी सरंक्षण अधिनियम के अंर्तगत अनुसूची 1 और इसी प्रकार सांप रेड सेंड बोआ (चकलोंन) दुर्लभ प्रजाति का है वन्यप्राणी सरक्षण अधिनियम के अंर्तगत अनुसूची 4 में शामिल है।


अभियुक्तगण द्वारा न्यायालय में आज जमानत हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था। म0प्र0 राज्य की ओर से अभियोजन अधिकारीश्रीमती सुधाविजयसिंह भदौरिया राज्य समन्वयक (वन एवं वन्यप्राणी) लोक अभियोजन भोपाल एवं अभियोजन अधिकारी एवं जिला समन्वयक (वन एवं वन्यप्राणी) श्री प्रशांत त्रिवेदी द्वारा शासन का पक्ष रखते तर्क किये कि वन्यजीव सुनहरा उल्लू और रेड सैंड बोआ काफी दुर्लभ किस्म की प्रजाति है जो कि अनुसूची-01 और अनुसूची-04 में आते है अपराध की प्रवृत्ति गम्भीर है। सुनहरा उल्लू रेअर केस में पाये जाते है। वन्यजीवों के बढ़ते अपराध से प्रकृति का असंतुलन बिगड़ रहा है। न्यायालय ने अभियोजन के तर्को से सहमत होकर अभियुक्तगण का जमानत आवेदन निरस्त किया गया।


प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी अभियोजन अधिकारी श्रीमती सुधाविजयसिंह भदौरिया राज्य समन्वयक (वन एवं वन्यप्राणी) लोक अभियोजन भोपाल एवं जिला समन्वयक (वन एवं वन्यप्राणी) लोक अभियोजन श्री प्रशांत त्रिवेदी द्वारा की गई।