एस.सी. एस.टी के साथ अपराध पर अंकुश लगाना अभियोजन का काम - विशेष न्यायाधीश श्री प्राण

  राजगढ। मध्यप्रदेश लोक अभियेाजन संचालनालय द्वारा विभिन्न प्रकार के गंभीर अपराधों में सतत् माॅनिटरिंग एवं अभियोजन के वर्तमान स्तर को और सुदृढ बनाये जाने के उद्येश्य से लोक अभियोजन संचालक श्री पुरूषोत्तम शर्मा आईपीएस अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक भोपाल द्वारा वन,एससी एसटी, पाॅक्सो, महिला अपराध एवं एनडीपीएस के स्टेट को-आर्डिनेटर बनाये गये है। उक्त सभी अपराधों में नियमित बेबीनार का आयोजन कर प्रदेश के सभी अभियेाजन अधिकारीगणों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 


              आज दिनांक 17.08.2020 को ऑनलाईन वेबीनार के माध्यम से SC ST act विषय पर एक दिवसीय आॅनलाईन सेमीनार श्री पुरूषोत्तम शर्मा, महानिदेशक/संचालक लोक अभियोजन म.प्र. की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। बेबीनार में श्री प्राणेश कुमार प्राण अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश इंदौर म.प्र. ने मुख्य वक्ता एवं विषय विशेषज्ञ के रूप में तथा श्री संदीप पाण्डे डी.पी.ओ. अजाक जबलपुर एवं श्रीमती अनिता शुक्ला डी.पी.ओ. अजाक इंदौर ने विशेषज्ञ के रूप में व्याख्यान दिये गये।


प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा श्री त्रिलोकचंद्र बिल्लौरे म.प्र. राज्य समन्वयक एस.सी.ध्एस.टी. एक्ट डी.डी.पी. धार द्वारा तैयार की गई तथा कार्यक्रम का संचालन डी.पी.ओ. धार द्वारा किया गया। प्रशिक्षण में प्रदेश के लोक अभियोजन विभाग के 600 से अधिक अभियोजन अधिकारी सम्मिलित हुए।


 


           प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री पुरूषोत्तम शर्मा ने अपने उदबोधन में दलितों के साथ हो रहे अत्याचार के बारे में बताया और अपने पुलिस अधीक्षक पन्ना तथा पुलिस अधीक्षक छिंदवाड़ा के रूप में कार्य करते हुये अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के साथ हो रहे अत्याचारों के अपने अनुभव सभी के साथ साझा किए। श्री शर्मा ने छिंदवाड़ा की तहसील सौसर में अपने कार्यकाल के दौरान एक पीड़ित दलित महिला के शारीरिक एवं मानसिक शोषण की शिकायत पर अपराध की कायमी करवाये जाने और आरोपी द्वारा महिला के गर्भवती होने पर उसके गर्भपात करवाने के दौरान सेप्टीशीमिया से उसकी मृत्यु होने की मार्मिक एवं ह्रदयस्पर्शी उदाहरण प्रस्तुत कर दलितों को उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के विषय में विस्तार से बताया। भारतीय संविधान, सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के विषय में विस्तार से चर्चा की।


 


            उन्होने कहां कि दलित हमारे समाज के अभिन्न अंग है। अब समय आ गया है कि जब हम उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोडे। दलितों पर हो रहे अत्याचार पर चिंतित होते हुए उन्होंने कहां कि दलित पर अत्याचार करने वालों को सख्त से सख्त सजा कराने की आवश्यकता है जिससे समाज में व्याप्त इस कुप्रथा का अंत किया जा सके।


 


       वर्तमान में म.प्र. के प्रत्येक जिले मे विशेष न्यायालयों का गठन किया गया है। म.प्र. में एससी-एसटी एक्ट के 21,158 प्रकरण लंबित है। म.प्र. में जिला होशंगाबाद, खण्डवा, मुरैना, सतना, सिवनी, उज्जैन व विदिशा के विशेष न्यायालय में उप संचालक अभियोजन रेग्यूलर कैडर से संचालन किया जा रहा है जहां पर सजायाबी का प्रतिशत अच्छा है तथा शेष जिलों में में जी.पी.ध्ए.जी.पी. द्वारा संचालन किया जा रहा है। आपने यह भी बताया कि शेष जिलों में विशेष न्यायालयों में प्रकरणों की संख्या अधिक होने से रेग्यूलर कैडर के अधिकारियों द्वारा पैरवी कराने हेतु शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।


 


             इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए आपके द्वारा श्री त्रिलोक चंद्र बिल्लौरे को संपूर्ण राज्य हेतु एससी/एसटी एक्ट के प्रकरणों के प्रभावी निराकरण हेतु ‘’राज्य समन्वयक’’नियुक्त किया गया है। श्री शर्मा ने अपना पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए कहां कि श्री बिल्लौरे के नेतृत्व में म.प्र. के अभियोजन अधिकारी, एस.सी.ध्एस.टी. एक्ट के प्रकरणों में अपराधियों को अधिक से अधिक सजा से दंडित कराकर एक सभ्य समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।


             श्री प्राणेश कुमार प्राण, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश इंदौर ने अपने व्याख्यान में एस.सी.ध्एस.टी. एक्ट के प्रकरणों के प्रभावी अभियोजन संचालन के विषय में बताया। श्री प्राण ने बताया कि एस.सी.ध्एस.टी. एक्ट के अपराध का विचारण किस तरह किया जाना चाहिए, जिससे दोषियों को अधिकतम सजा कराई जा सके। उन्होंने भारतीय संविधान के अंतर्गत दलितों को प्राप्त अधिकार एवं एस.सी./एस.टी. एक्ट के महत्वपूर्ण प्रावधानों की प्रक्रिया संबंधी संपूर्ण जानकारी प्रशिक्षणार्थियों से साझा की।


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