है महादेव इन दुष्ठो को कोई इलाज है या नहीं? ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर की गौशाला में एक दर्जन गौ माताओं की रहस्मय तरीके से मौत? महाकाल का दुग्धाभिषेक करवाने वाली एक दर्जन गायों की मौत का जिम्मेदार कौन?

                      



  • न्यूज़ क्रेडिट ,राहुल शर्मा,जितेंद्र दुबे


उज्जैन।। जिस दूध से महाकाल का अभिषेक हो रहा हो, जिसके चरणामृत से हर दर्शनार्थी खुद को शिव भक्ति में लीन पाता हो, मंदिर गौशाला प्रभारी एक महीने से निरीक्षण करने नहीं पहुंचे, गौ माताओं को खाने के लाले पड़ गए लेकिन फिर भी महादेव का दुग्धाभिषेक नहीं छोड़ा, अपना कर्म निभाते हुए एक दर्जन से ज्यादा गौमाताओं ने अपने प्राण त्याग दिए। यही नहीं पूरे मामले की लीपापोती करने में शहर के प्रमुख राजनेता भी लग गए, आखिर एक बिशिष्ट पद पर आसीन महिला नेत्री के जेठ इस गौशाला के सह प्रभारी जो हैं, अब महाकालेश्वर मंदिर के कर्णधारों ने पोस्टमाटर्म का हवाला देकर जांच करवाने की बात कही है देखना है जांच कितनी सही और कितनी झूठ साबित होती है।


 


पूरे घटनाक्रम के अनुसार ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर की चिंतामन स्थित गौशाला में शुक्रवार रात एक दर्जन गौमाताओं की मौत हो गई। गौशाला के कर्मचारियों ने सबसे पहले मामले की जानकारी गौशाला के प्रभारी अधिकारी प्रतीक द्विवेदी व गोशाला प्रभारी निरंजन जूनवाल को दी जो लंबे समय से गौशाला देखने तक नहीं गए। दोनों ने मामले की जानकारी मंदिर प्रशासक सुजान सिंह रावत को दी आनन फानन में अधिकारियों ने पशु चिकित्सालय को सूचना दी। इसके बाद पशु चिकित्सकों का दल चिंतामन गौशाला पहुंचा। देर रात तक डॉक्टर अन्य गायों के स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए थे।


 


इस गंभीर घटना ने मंदिर प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है। हमारे सूत्र बताते हैं कि गौशाला के प्रभारी अधिकारी प्रतीक द्विवेदी व गोशाला प्रभारी निरंजन जूनवाल गौशाला शहर के पांच किमी दूर स्थित होने के चलते लंबे समय से गौशाला नहीं गए थे और फोन पर ही जानकारी लेकर अधिकारियों को जानकारी और फीड बेक दे रहे थे। यही नहीं इस लापरवाही की जानकारी मंदिर प्रशासक सुजान सिंह रावत को भी थी, लेकिन लगता है राजनैतिक दल के प्रभाव के कारण उन्होंने भी लापरवाहों पर कार्रवाई नहीं की जिसका नतीजा मूक प्राणियों को भुगतना पड़ा। बावजूद किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। शाम पांच बजे से रात नौ बजे के बीच 12 से ज्यादा गायों ने दम तोड़ दिया जबकि गौशाला में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं जो लंबे समय से बंद पड़े हैं। यही नहीं हमारे सूत्र यह भी बताते हैं कि मंदिर की सुरक्षा अधिकारी रूबी यादव ने आज तक गौशाला का औचक निरीक्षण भी नहीं किया जबकि मंदिर के सभी प्रकल्पों की सुरक्षा व्यवस्था की जवाबदेही इन्ही की है। रात में गौशाला में कार्य करने वाले कर्मचारी या तो नशे के हालात में होते हैं या फिर गौशाला पर ध्यान ही नहीं देते बल्कि अपने कक्ष में जाकर आराम फरमाते हैं जिनका समय समय पर निरीक्षण करना मंदिर परिसर की सुरक्षा अधिकारी और गौशाला प्रभारी की जवाबदेही है।


 


अब मंदिर के जिम्मेदार गायों की मौत फूड पॉइजनिंग से होना बता कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर खुलासा करने की बात कह रहा है जबकि स्वतंत्रता दिवस का अवकाश, फिर रविवार और तीसरे दिन यानि सोमवार को शाही सवारी में उलझे शहर वासियों गौ दानदाताओं को यह पता नहीं चल सकेगा कि इन मूक प्राणियों का प्राणहर्ता कौन है?


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