उज्जैन का हस्तिनापुर बन गया छत्री चौक और गोपाल मंदिर क्षेत्र,,,,, नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी धृतराष्ट्र की भूमिका में

क्या आप जानते हैं कि उज्जैन मैं हस्तिनापुर कहां है ?,,,,,,यदि आप नहीं जानते,,,,,, तो आइए हम आपको बताते हैं कि उज्जैन का हस्तिनापुर ,,,,,,,छत्री चौक और गोपाल मंदिर का क्षेत्र है, क्योंकि इस क्षेत्र में वह सब कुछ होता है जो महाभारत काल के हस्तिनापुर में होता था ,दोनों में बड़ी समानता यह है कि हस्तिनापुर का राजा धृतराष्ट्र, अंधा था और इस क्षेत्र के रखवाले ,खाकी वर्दी से लेकर नगर पालिक निगम के अधिकांश अधिकारी भी हस्तिनापुर के राजा की तरह अंधे है, शहर का यह वह क्षेत्र है जहां देह व्यापार से लेकर अवैध शराब का विक्रय और भयंकर अतिक्रमण से लेकर गुंडागर्दी सब कुछ खाकी वर्दी और नगर निगम के अंधे अधिकारियों की शह पर होता है, इस क्षेत्र का में नगर पालिक निगम के अस्थाई कर्मचारी साउथ की फिल्मों में दिखाए जाने वाले गुंडों की तर्ज पर खुलेआम अनैतिक कृत्य करते हैं, जिन्हें नगर पालिक निगम के ही वरिष्ठ अधिकारियों ने लगभग अघोषित लाइसेंस दे रखा है, इन अस्थाई कर्मचारियों के साथ 10-15 गुंडों की गैंग हमेशा चलती है, जो छेत्र के व्यापारियों से पूरी सड़क पर कब्जा करने के एवज में हर महा मोटी रकम वसूल करती है, इसके अलावा गुंडों की यह गैंग छत्री चौक क्षेत्र में 200 से अधिक अवैध अतिक्रमण करवा कर यह सिद्ध करती है की इस क्षेत्र में उन्हीं की चलती है। ऐसा नहीं है कि ,,,,,नगर पालिक निगम के अधिकारियों को इन गुंडों की गैंग के बारे में पता ना हो ,,,लेकिन धृतराष्ट्र से बने नगर निगम के अधिकारियों से कोई उम्मीद करना मूर्खता ही मानी जाएगी, दरअसल गुंडों इस गैंग को वायरलेस सेट इस लिए ही दिए जाते हैं कि यह गैंग अधिकारियों के लिए अवैध वसूली कर सके, पूरे छतरी चौक को गिरवी रखने के अलावा इस गैंग ने धार्मिक पुस्तके बेचने वालों को अपनी-अपनी दुकानें 10 से 15 फीट तक आगे बढ़ाने की खुली छूट दे रखी है इस छूट के एवज में प्रतिमाह मोटी रकम वसूल कर नगर निगम के अधिकारियों को पहुंचाई जाती है ,यही वजह है कि नगर पालिक निगम के अधिकारी धृतराष्ट्र की भूमिका में रहते हैं, क्षेत्र के अनेक लोगों ने कई बार अधिकारियों को शिकायत भी की लेकिन कोई कार्यवाही करना तो दूर बल्कि गुंडों की गैंग को और अधिक अधिकार देकर क्षेत्र में उत्पात मचाने का ठेका दिया जाता रहा है ,खाराकुआ  पुलिस थाना तो इस कदर बिका हुआ है कि थाने से 5 कदम की दूरी पर ही होने वाले अवैध धंधों को वह देखना भी पसंद नहीं करता। जहरीली शराब से एक दर्जन से ज्यादा मजदूरों की मौत के लिए खारा कुआं थाना का पूरा स्टाफ और नगर पालिक निगम के वरिष्ठ अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार है, नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की शह पर ही नगर पालिक निगम के पुराने जर्जर भवन में  अवैध शराब बनाने की फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। मुख्यमंत्री यदि सच में पूरे कांड की निष्पक्ष जांच करवाना चाहते हैं तो उन्हें नगर पालिक निगम के आयुक्त और उपायुक्त के अलावा निगम के राजस्व विभाग के अधिकारियों सहित खाराकुआ थाने के पूरे स्टाफ को जांच के घेरे में लेना चाहिए तभी लाशों को शायद इंसाफ मिल सके।