आन्तरिक साजसज्जा में चित्रकला का बढ़ रहा महत्व

 









श्री बाछंग  जी का


यह लेख  आपकी यादों को जीवंत करने  का मार्ग प्रशस्त करेगा, इसी विश्वाश के साथ सन्डे स्पेशल में पढ़िए यह लेख

फाईन आर्ट्स एम. एस. युनिवर्सिटी, बड़ोदा (कॉरपोरेट डिजाइनर व इंटीरियर आर्टिस्ट)- सभी कला प्रेमीयों व महानुभावों को सादर वन्दन... 

आज आपसे रुबरु होने का सिर्फ एक ही कारण है कि दुर्भाग्यवश लुप्त हो रही भारतीय चित्रकला को बचाएं, उसे समझे उसका आनंद लें व अपनी यादों में संजोये, *"क्योंकि यादें अमूल्य है"*

आज हम भारतीय चित्रकला के बारे में कुछ बातें करते हैं, जिस कला के माध्यम से हम अपनी पेंटिंग को जीवित रखने में कामयाब हुए हैं, इसी के द्वारा हमें कलर्स की महत्वता का आभास होता है, और यही कारण है कि हर इंटीरियर प्लानिंग करने से पहले रंगों के बारे में जानना चाहते हैं, ताकि हमारा वर्क दूसरों से बेहतर दिखे! 

भारतीय चित्रकारी के प्रारंभिक उदाहरण प्रागैतिहासिक काल के हैं, जब मानव गुफाओं की दीवारों पर चित्रकारी किया करता था। भीमबेटका की गुफाओं में की गई चित्रकारी 5500 ई.पू. से भी ज्यादा पुरानी है।

7वीं शताब्दी में अजंता और एलोरा गुफाओं की चित्रकारी भारतीय चित्रकारी का सर्वोत्तम उदाहरण हैं।

भारतीय चित्रकारी में भारतीय संस्कृति की भांति ही प्राचीनकाल से लेकर आज तक एक विशेष प्रकार की एकता के दर्शन होते हैं। प्राचीन व मध्यकाल के दौरान भारतीय चित्रकारी मुख्य रूप से धार्मिक भावना से प्रेरित थी, लेकिन आधुनिक काल तक आते-आते यह काफी हद तक लौकिक जीवन का निरुपण करती है। आज भारतीय चित्रकारी लोकजीवन के विषय उठाकर उन्हें मूर्त कर रही है।

भारतीय चित्रकारी की शैलियां

भारतीय चित्रकारी को मोटे तौर पर भित्ति चित्र व लघु चित्रकारी में विभाजित किया जा सकता है। भित्ति चित्र गुफाओं की दीवारों पर की जाने वाली चित्रकारी को कहते हैं, उदाहरण के लिए अजंता की गुफाओं व एलोरा के कैलाशनाथ मंदिर का नाम लिया जा सकता है। दक्षिण भारत के बादामी व सित्तानवसाल में भी भित्ति चित्रों के सुंदर उदाहरण पाये गये हैं। लघु चित्रकारी कागज या कपड़े पर छोटे स्तर पर की जाती है। बंगाल के पाल शासकों को लघु चित्रकारी की शुरुआत का श्रेय दिया जाता है।

भारतीय चित्रकला की इसी परंपरा को जीवित रखने और पेंटिंग के प्रति आम आदमी का रुझान हमेशा कायम रहे इसी उद्देश्य के साथ पिता श्री नगजीराम जी बाछंग ने उज्जैन में लगभग 60-65 साल पहले शहर के सबसे प्राचीन गोपाल मंदिर क्षेत्र में "नरेश आर्ट्स" के नाम से चित्रकारी के क्षेत्र में अपना काम शुरू किया था, आप चित्रकला के महागुरू व बहुत अच्छे कलाकार थे, बाल्यावस्था से ही रंगों को जीवन का हिस्सा बनाने वाले श्री नगजीराम जी ने लगभग 14,15 वर्ष की उम्र में ही हाथों में ब्रश थाम लिया था! और अपनी कल्पनाओ मैं प्रकृति के रंग भरना शुरू कर दिए थे, यह सिलसिला अंतिम सांस तक चलता रहा, आज भी उनके हाथों की पेंटिंग शहर के अनेक देवालयों व भव्य भवनों  में सुशोभित है!

81 वर्ष की उम्र में 21 जून 2016 को दुनिया को अलविदा करने वाले श्री बाछंग ने यह कला जीवित रहे इसके लिए वे अपने परिवार में कला का बीज रोपित कर गए! 

आज मैं उन्ही का सबसे बड़ा पुत्र अशोक बाछंग आपसे रूबरू होते हुए बड़ा गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ !

अन्य दो छोटे भाई भी साथ ही हैं, वे भी कला के प्रति समर्पित हैं!

सन 1991 में पिता के आशीर्वाद से मुझे एम. एस. यूनिवर्सिटी बड़ौदा में प्रवेश मिला, यहां फाइन आर्ट्स में 4 साल का डिग्री कोर्स करने के बाद 1995 में स्विफ्ट एडवरटाइजिंग इन्दौर जैसी प्रतिष्ठित एजेंसी से अपना कार्य प्रारंभ किया। जहां राहुल जैन साहब के साथ रह कर काफी अच्छा अनुभव प्राप्त किया, लेकिन स्वयं का करने की चाहत ने मुझे नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया, सन 2009 में ब्लूलाइन डिजाइन स्टूडियो के नाम से इंदौर में अपना ऑफिस शुरू किया जहां कई बड़ी-बड़ी कार्पोरेट कंपनीयों के साथ काम करने का अवसर प्राप्त हुआ!

लेकिन पिता के जाने के बाद "नरेश आर्ट्स" जो बंद होने की कगार पर था उसे अपने भाइयों के साथ मिलकर फिर से पुनर्जीवित किया, हम चाहते है कि इस कला को इतनी आसानी से खत्म नहीं होने दें जो हमें पिता से विरासत के रूप में मिली, हांलाकि दुर्भाग्य वश यह कला धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है, जो लोग मार्डन आर्ट के पीछे भाग रहे हैं, उनसे विनती है कि रियलिस्टिक को समझे उसका आनंद लें व अपनी यादों में संजोये, "क्योंकि यादें अमूल्य है"

इस कला को हमने अपनी मेहनत व लगन से शौक में परिवर्तित किया जिसकी टैगलाइन है "शौक जगाओ, शौक बिन जीवन अधूरा" आज नरेश आर्ट्स (आर्ट गैलरी) इंटीरियर आर्टिस्ट के रूप में कार्यरत है, इसमें इन्दौर की सिनीयर इंटीरियर डिजाइनर मैडम अश्विनी घोड़के जी व अन्य इंटीरियर भाइयों की मदद से आज हम बड़े-बड़े बंगलों, हास्पिटलों एवं होटलों में अपनी कलाकृति लगा कर उन्हें भव्यता व प्रतिष्ठा प्रदान कर रहे हैं! इसके लिए हम आप सभी के दिल से बहुत आभारी हैं! 

हम शौकीया लोगों के लिए गिफ्ट आर्टिकल के रूप में भी पेंटिंग तैयार कर रहे हैं, जिससे लोगों में इसकी चाहत व मांग बढ़ रही हैं, यह गिफ्ट उनके लिए अनमोल हो गई है। इस कार्यप्रणाली में आज की टेक्नोलॉजी का भी समावेश हैं जो समय के अनुसार जरूरी है, लेकिन फाइनली उस पर जो हेंड वर्क करते हैं वह लाजवाब है! हम इस आर्ट को देश के बड़े-बड़े शहरों तक चार्टर्ड बस एवं कोरियर द्वारा  कला प्रेमियों को घर पर उपलब्ध करवा रहे है!

आप सभी कलाप्रेमीयों से आग्रह है भारतीय चित्रकला को कभी अन्य कला से कम ना आंके, उसे दिलों में संजोये, उसका महत्व समझे उसका सन्मान करें उसे नवाजें।

हमें हमेशा आपके आशीष और सहयोग की कामना रहेगी! 

धन्यवाद! 

अशोक बाछंग

नरेश आर्ट्स, गोपाल मंदिर उज्जैन

मो. 98275 05533, 98270 60688

Email: blueline.advt@gmail.com

www.bluelineindia.in

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