रेमडेसीविर इंजेक्शन को लेकर हर तरफ खामोशी,,,, 24 अप्रैल के बाद प्रशासन ने नहीं दी कोई जानकारी,,,,,, जनप्रतिनिधियों के मुंह पर ताले लटके,

 उज्जैन । शहर में रेमडेसीविर इंजेक्शन को लेकर न सिर्फ भारी किल्लत मची हुई है बल्कि यह इंजेक्शन न मिलने से सांसे थम रही है , सूत्रों के मुताबिक मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल के उज्जैन कार्यालय में पदस्थ टाइपिस्ट कि कल चरक अस्पताल में सांसे इस इंजेक्शन के ना मिलने से थम गई ,सह कर्मियों का कहना है कि मशक्कत के बाद उन्हें चरक में भर्ती तो कर लिया गया था लेकिन वहां ना तो उन्हें ऑक्सीजन दी गई और ना ही इंजेक्शन उपलब्ध करवाया गया,गंभीर इंफेक्शन वाले मरीजों को भी आसानी से इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है ,आश्चर्य की बात यह है कि भोपाल से लगाकर उज्जैन तक शासकीय भोंपू इस इंजेक्शन को लेकर लगातार यह जानकारी दे रहा है कि शासन प्रशासन संवेदनशील है और गंभीर मरीजों को यह इंजेक्शन उपलब्ध करवाया जा रहा है। लेकिन हकीकत किसी से छुपी नहीं है, उज्जैन शहर में इस इंजेक्शन को लेकर पॉजिटिव आने वाले मरीजों के परिजन खासे परेशान हैं, इंजेक्शन कब कहां और कैसे मिलेगा, यह बताने को कोई तैयार नहीं है, अस्पतालों में भर्ती मरीजों को इंजेक्शन लाने की पर्ची हाथ में थमा दी जाती है, बेचारा परिजन स्लीप लेकर दर-दर की ठोकरें खाने के साथ-साथ अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर नेताओं और अधिकारियों के दर पर ठोकरें खाने को मजबूर हैं, लेकिन उसे यह बताने को कोई तैयार नहीं है कि यह इंजेक्शन आएगा भी या नहीं आएगा,,,, जिला प्रशासन ने भी कुछ कालाबाजारी करने  वालों को पकड़कर चुप्पी साध ली है,,, 24 अप्रैल को बुलेटिन जारी कर बताया गया था कि रेमडेसीविर इंजेक्शन कौन-कौन से अस्पतालों में कितने दिए गए हैं ,,,,लेकिन 24 तारीख के बाद से इस तरह की कोई जानकारी मीडिया को नहीं दी गई,,, शहर में और जिले में कितने रेमडेसीविर इंजेक्शन की आवश्यकता है और कितने प्राप्त हो रहे हैं ,,,,और इनको लगाने का पैमाना क्या है,,,,, यह बताने को कोई तैयार नहीं है ,,,,,  इंजेक्शन को लेकर जनप्रतिनिधियों के मुंह पर ताले लटके हुए हैं ।ऐसे विकट समय जब आम जनता को जनप्रतिनिधियों की आवश्यकता है, तब अधिकांश जनप्रतिनिधि कोई जानकारी देने को तैयार नहीं है, आश्चर्य इस बात का भी है कि उखड़ती सांसों को राहत देने वाला यह इंजेक्शन जिले में कब आता है और कब बट  जाता है कोई नहीं जानता । आपको याद होगा कि उज्जैन के जिला प्रशासन ने यह दावा भी किया था कि सिर्फ रेमडेसीविर इंजेक्शन के लिए अस्पतालों में ऑक्सीजन वाले बेड पर भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है,,, ऐसे मरीजों को यह इंजेक्शन कॉविड केयर सेंटर में भर्ती होने पर भी मिल जाएगा,,,, लेकिन ऐसे कितने मरीजों को यह इंजेक्शन मिला है यह शोध का विषय है। 

बरहाल अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों को यह इंजेक्शन प्राप्त करने में एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।


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