कोरोना विस्फोट,,, आज 300 का आंकड़ा भी पार कर लिया,,,, शहर में होने वाली मौतों को लेकर भी संशय की स्थिति

 उज्जैन। शहर में कोरोना को लेकर हालात कितने ठीक है यह तो अब शोध का विषय हो सकता है क्योंकि लगातार जानकारियां सामने आ रही है कि शहर के अस्पताल इस वक्त पूरी क्षमता के साथ हाउसफुल है कोरोना के बढ़ते मरीजों को कहां भर्ती किया जाए इसको लेकर कोई विशेष निर्णय सामने नहीं आया है।


आज हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक 133


8 जांच में 317 पॉजिटिव मरीज सामने आए हैं यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है एक्टिव मरीज की संख्या भी बढ़कर 1721 हो गई है शहर के किसी भी अस्पताल में एक भी बेड ऑक्सीजन और वेंटिलेटर वाले उपलब्ध नहीं है आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के कोरोना नोडल अधिकारी डॉक्टर सुधाकर वेद से चर्चा में उन्होंने बताया कि आज तक ऐसी स्थिति कभी निर्मित नहीं हुई कि हम हमारे ही ट्रस्टीयों को बेड के लिए इंकार करें, उन्होंने यह भी बताया कि एक जैन मुनि के लिए भी  बहुत जोर लगाया लेकिन बेड उपलब्ध नहीं करवा सकें।

 प्राइवेट अस्पतालों की बात करें तो वहां लूट के कोई पैमाने तय नहीं है कहने को अस्पताल में बेड से लेकर हर तरह की जांच की दरें तय कर दी गई है लेकिन वास्तविकता किसी से छुपी नहीं है ,इधर शहर में मौत को लेकर भी अब आम नागरिक भी सवाल खड़े करने लगे हैं श्मशान और कब्रिस्तान की हालत किस तरह काबू से बाहर है इसका उदाहरण क्राइसिस कमेटी की बैठक में सामने आया सभी ने कोरोना पॉजिटिव और संदिग्धों के लिए अलग से शमशान और कब्रिस्तान की मांग की जो इस बात का प्रमाण है कि बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव या कोरोना संदिग्ध मरीजों के शव श्मशान घाट में पहुंच रहे हैं आज दिन भर एक युवा अभिभाषक की मौत को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म रहा अभिभाषक की मौत कोरोना से हुई या सामान्य इसकी पुष्टि करने वाला कोई नहीं है लेकिन मौत हुई इस सच को स्वीकार करना ही होगा अभिभाषक राजेंद्र उपाध्याय के अलावा एक ओर होनहार युवक  काल के गाल में  समाया

प्राप्त जानकारी के अनुसार कुमार गली बहादुरगंज निवासी युवक विक्की लश्करी की कोरोना के इलाज के चलते असमायिक मौत हो गई।

खुश मिजाज व मिलनसार व्यक्तित्व के धनी युवक विक्की तस्करी को 4 दिन पूर्व ही बुखार आने पर इलाज किया जा रहा था प्राप्त जानकारी के अनुसार इंजेक्शन की अनुपलब्धता के कारण उसके फेफड़ों में इन्फेक्शन ज्यादा हो गया था जिसके कारण उसकी मौत होना बताई जा रही है युवक का 1 वर्ष पूर्व ही विवाह हुआ था तथा 4 माह की एक पुत्री को छोड़कर वह चल बसा। इस तरह कुछ और मौत भी चर्चाओं में रही सवाल यह नहीं है कि मौत को रोना से हुई या नहीं सवाल यह है कि अचानक शहर में युवाओं की मौत होने से लोग असमंजस में है इधर नेताओं का अचानक नगर प्रवेश और अस्पतालों में ताबड़तोड़ निरीक्षण आम जनता की गले नहीं उतर रहा है जनता का कहना है कि शहर में कोरोना के इलाज के लिए बेड उपलब्ध नहीं है इंफेक्शन कम करने वाले इंजेक्शन को लेकर भी अभी तक कोई विशेष रणनीति सामने नहीं आई है लगातार शहर में मौत होने से भय का वातावरण है।

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