रियल हीरो,,, न मासूम बच्चों को गोद में खिलाने की चाहत और ना वृद्ध माता-पिता की सेवा का फर्ज ,,,,,सिर्फ इसलिए पूरा नहीं क्योंकि ,,उस अलबेले को आपकी जान की चिंता है

 उज्जैन। घर में डेढ़ साल की मासूम बच्ची और वृद्ध माता-पिता को सिर्फ दूर से देखकर मन भरने की इजाजत किसी और ने नहीं बल्कि स्वयं ने स्वयं को इसलिए दी है ताकि डेढ़ साल की बच्ची और वृद्ध माता-पिता कोरोना से सुरक्षित रह सके। यह कहानी उज्जैन के ही एक ऐसे युवा चिकित्सक की है ,जो पिछले 365 दिनों से कोरोना मरीजों की सेवा में लगा है ,लेकिन स्वयं के वृद्ध माता-पिता की सेवा से खुद को दूर कर लिया है , यहां तक की अपनी डेढ़ साल की बेटी को भी गोद में उठाकर प्यार ना दे सका इस चिकित्सक का नाम है डॉक्टर रौनक एलची,,,,,,,

रौनक,, पिछले 1 वर्षों से उज्जैन संभाग के कोरोना पॉजिटिव मरीजों की न सिर्फ मानिटरिंग कर रहे हैं बल्कि उनसे  सतत संपर्क में भी है, मरीजों को दवा देने से लेकर उनकी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उन्हें परामर्श देने के काम में लगे, डॉक्टर रौनक  का कहना है कि पिछले 1 वर्षों से वह ठीक से सो भी नहीं पाए हैं, प्रतिदिन लगभग 18 घंटे काम करने वाले इस युवा चिकित्सक के पास सैकड़ों फोन प्रतिदिन आते हैं सबके फोन रिसीव करना और उन्हें उचित सलाह देना आसान काम नहीं है ,लेकिन डॉक्टर  रौनक बताते हैं कि अब तो उन्हें इसकी आदत पड़ गई है, पारिवारिक जिम्मेदारियों को ठीक से निर्वाहन ना  कर पाने का जितना दुख नहीं है ,उससे अधिक दुख उन्हें इस बात का है कि शहर की जनता अपनी जान को जोखिम में डालकर बेवजह सड़कों पर घूम रही है, जिसकी वजह से कोरोना के मरीजों की संख्या में दिन प्रतिदिन वृद्धि हो रही है।

 उन्होंने दैनिक मालव कांति को संदेश देते हुए कहा कि जिस तरह देश की सीमाओं पर सिपाही अपनी जान की बाजी लगाकर देश के नागरिकों की जान को बचाने के लिए खुद की जान की परवाह नहीं कर रहा है उसी तरह देश के नागरिकों को भी अपना फर्ज समझ कर अपनी जान की सुरक्षा और परिवार के सदस्यों की जान की सुरक्षा के साथ-साथ प्रदेश और देश की सुरक्षा के लिए अपने अपने घरों में रहकर इस कोरोना की जंग को जीतना चाहिए। उन्होंने सीमा पर लड़ रहे जवान और घर की चार दीवार में रहकर कोरोना से लड़ रहे नागरिक को एक ही तराजू में तौलते हुए कहा कि सीमा पर लड़ रहे जवान और घर पर ही रह कर कोरोना को हराने का जज्बा दोनों देश सेवा का ही काम है।

शहर के वरिष्ठ डॉक्टर व आरआर टीम के नोडल अधिकारी डॉक्टर रौनक एलची का यह संदेश यदि शहर की जनता स्वीकार करें तो बहुत जल्द कोरोना के बढ़ते प्रकोप पर काबू किया जा सकता है। उनका यह भी संदेश है कि यदि ऑक्सीजन लेवल 95% से कम है तथा सांस की गति 24 प्रति मिनट बनी हुई है तो   कॉविड टेस्ट करवाना चाहिए और यदि मरीज पॉजिटिव पाया जाता है तो उसका इलाज घर पर ही संभव है। डॉक्टर रौनक एलची के साथ साथ दैनिक मालव क्रांति भी शहर की जनता से अपील करता है कि स्वयं और परिवार की रक्षा के लिए कृपया कुछ दिनों के लिए घर से बाहर अनावश्यक ना निकले और सेना के उस जवान का सम्मान करें जो - 20 और माइनस 30 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान में भी आपकी रक्षा के लिए देश की सीमा पर न सिर्फ तैनात है बल्कि मौका आने पर अपने प्राणों की आहुति तक देने को तैयार है आपके प्राणों के लिए यदि कोई अनजान सैनिक इतना करने को तैयार है तो फिर आपको तो  सिर्फ घर पर रहने का ही बलिदान देना है।


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