नमो: बंगाल को जीतने के फेर में देश के अवाम का विश्वास भी खोया?

 

(निरुक्त भार्गव, पत्रकार, उज्जैन की फेस बुक वाल से साभार,, )


फाइल चित्र उज्जैन के चक्रतीर्थ्का


श्री निरुक्तभार्गव देश के जाने-माने पत्रकार और चिंतक है, समय-समय पर अपनी लेखनी के जरिए आम आदमी के दर्द और  ज्वलंत मुद्दों पर बे वाक लिखते हैं।) 

इस रविवार की मध्यरात्रि जब मैं अपने मन की ये बात कह रहा हूं, तो ना जाने ऐसा क्यों लग रहा है कि चारों दिशाओं में “श्मशान जैसी शांति” पसरी हुई है! सारे न्यूज़ चैनल्स बहुत-ही विनम्रता से अपने बुलेटिन और डिबेट परोस रहे हैं! ट्विटर को तो ना जाने क्यों सांप सूंघ गया है, जो वो पेट के बल लेट गया है! व्हाट्सएप समूहों को तो जैसे सन्निपात हो गया है, जो वे शुतुरमुर्ग की भांति गरमागरम रेत में गर्दन तक धंसे जा रहे हैं! माशाल्लाह, फेसबुक तो आयने को ही ध्वस्त कर धम्म से दूर जा गिरा है! वेब पोर्टल्स की बात करना तो जैसे समय गंवाना प्रतीत होता है! बात रह गई अख़बारों की, तो आप मानकर चलिए कि तस्वीर वो ही सामने आने वाली है, जिसकी जिल्लत कथित ‘मोदी मीडिया’ झेल रहा है!...


 बतौर राजनीति विज्ञान छात्र, मेरे लिए 02/05/2021 को देश के महज लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण 5 पूर्व-पश्चिम-दक्षिण प्रदेशों के विधानसभा चुनाव के नतीजों का एक पंक्ति का सार है, “नरेन्द्र मोदी पश्चिम बंगाल को जीतने के चलते देश के अवाम का विश्वास भी खो बैठे!”...मुझे पूरा इल्म है कि मेरी ये पंचलाइन भांति-भांति के खतरों को निमंत्रित कर सकती है! और ये भी कि निरपेक्ष भाव से पढने वालों का ध्यान भी आकृष्ट कर सकती है! बहरहाल, पूरे कन्विक्शन के साथ मुझे लग रहा है कि आज की इस टिप्पणी के विस्तार में जाने में कोई बुराई नहीं है!...


 पिछले 6 माह में पश्चिम बंगाल, तामिलनाड, केरल, पुडुचेरी और असम में राज्य स्तर पर जो भी घटनाक्रम चले और उनमें ‘इन्द्रप्रस्थ’ की जो शकुनी-टाइप भूमिका रही उसे कौन भूल सकता है? मेरी सलाह है कि बाबा रामदेव के तमाम प्रोडक्ट्स का आप भक्षण करें और अपनी-अपनी याददाश्त को ताज़ा करें कि किस तरह भाजपा की केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश और देश के भाजपा-शासित अन्य राज्यों के केन्द्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को बंगाल के चप्पे-चप्पे पर तैनात कर दिया गया था. देशभर के पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी कई महीनों तक वहां भेज दिया गया. यानी (उपराज्य) दिल्ली विधानसभा का पूरा का पूरा चुनाव प्रबंधन दोहराया गया!


 जितनी घंटियां मंदिरों में नहीं बजतीं और जिनकी इतनी घनघोर आवृत्ति ऑफिस-ऑफिस में तक नहीं सुनाई देतीं, उससे अनगिनत ज्यादा बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के अट्टहास-भरे स्वरों, भीड़-भाड़ वाली चुनावी रैलियों में हाथ हिलाते चित्रों और हवाई जहाज से हंसते-मुस्कुराते उतरते दृश्यों को देश के करोड़ों-करोड़ नागरिकों को समस्त प्रकार के उक्त जनसंचार माध्यमों ने बार-बार और लगातार पेश किया! सहसा लगने लगा था कि चूंकि कोलकाता से भारतवर्ष का सबसे अधिक विदेशी धन बतौर टैक्स प्राप्त होता है और बड़ा भाई-छोटा भाई की गिद्ध दृष्टि इस राज्य को कमांड करने में लग गई है, सो परिणाम भी उनके मनमाफिक ही आएंगे...!   


 बीजेपी के रणनीतिकारों के दावों पर भी गौर करना प्रासंगिक है: पांच सितारा होटलों में बैठकर वे खुद को धन्य समझ रहे थे कि मोदी-शाह की जोड़ी वो सब सकती है जो न कभी हुआ है और जो न किसी ने सोचा है! बंगाल जीतने की वो लत और जिद केन्द्रीय नेतृत्व के सिर चढ़ गई कि उन्होंने पेट्रोल-डीजल-घरेलु गैस टंकी के आसमान छूते भावों को नज़रअंदाज कर दिया! हरिद्वार महाकुम्भ के आयोजन में गंगा में डुबकी लगाने (पवित्र और पुण्य स्नान) के दौरान कोरोना संक्रमित हुए आरएसएस प्रधान मोहन भागवत की पीड़ा को तक भुला बैठे! दिल्ली घेरे बैठे किसानों की बात तो उनके लिए पहले से ही गैर-वाजिब थी! 


 चलते-चलते बात करते हैं देशव्यापी कोरोना संक्रमण की! मेट्रो-मेट्रो, स्मार्ट सिटी-स्मार्ट सिटी और गोकुल गांव-गांव तक की आबादी अभिशप्त हो रही थी! चूंकि चक्रवर्ती सम्राट, उनके चाणक्य, उनके सिपहसालार और उनकी फौज हर कीमत पर बंगाल का गढ़ फतह करना चाहते थे सो बाकी देश को छोड़ दिया भाग्य भरोसे! दलालों को अस्पताल में बिस्तर, दवाई, इंजेक्शन, ऑक्सीजन इत्यादि के एवज में उनके मनमुताबिक धनराशि देने के बावजूद आम लोगों के प्रियजन अत्यंत गन्दी परिस्थितियों में रोजाना अनगिनत संख्या में दम तोड़ते रहे! 24X7 श्मशानों और कब्रिस्तानों में वेटिंग चलती रही...कोरोना संक्रमण के चलते इवेंट्स, मार्केट और बिज़नस टैक्टिस का शिकार हुए परिवारों की इनती दारूण कथाएं हैं कि विश्व का सबसे बड़े पुराण का सन्दर्भ भी लजा जाए! 


 अब भला, आप ही  बताइये, गुजरात के बब्बर शेर ने क्या खोया और क्या पाया...???

 

 

(छवि: उज्जैन के क्षिप्रा नदी तट स्थित चक्रतीर्थ की)

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