आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई नजमा खान

 उज्जैन ।शिक्षिका नजमा खान आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई






।नजमा खान छत्री चौक डिस्पेंसरी में वैक्सीनेशन में ड्यूटी के दौरान बीमार हुई थी,  बाद में उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया, उन्हें माधव नगर अस्पताल में दाखिल किया गया था जहां इलाज न मिलने से उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। अखबारों में सुर्ख़ियों में खबर आने के बाद कल रात को फ्रीगंज स्थित एक निजी अस्पताल में उन्हें भर्ती किया गया था। बताया जाता है कि उन्हें न्यूरो सर्जन की सेवाओं की आवश्यकता थी लेकिन इसे नजरअंदाज कर उन्हें पहले माधव नगर और बाद में सिविल अस्पताल भेज दिया था, जहां कांग्रेस नेत्री नूरी खान ने उन्हें पर्याप्त इलाज न मिलने के कारण कल धरना भी दिया था,  नजमा खान मूल रूप से शिक्षिका थी और कॉविड 19 में उन्हें वैक्सीनेशन जैसे महत्वपूर्ण काम में ड्यूटी पर लगाया गया था, ड्युटी के दौरान ही नजमा की तबीयत खराब हुई और अब जिंदगी की जंग हार गई।


कांग्रेस ने कहा  : शासन प्रशासन का रवैया शर्मनाक, मृतक को 50 लाख एवं अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग, संबंधित अधिकारी पर हो कार्रवाई



उज्जैन वैक्सीनेशन सेंटर पर काम करते समय शास्त्र महिला कर्मचारी को ब्रेन हेमरेज हो गया था परंतु प्रशासन की किसी व्यक्ति ने इसकी सुध नहीं ली जा के दौरान महिला की मौत हो गई कांग्रेस पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि पीड़ित परिवार को 50 लाख एवं अनुकंपा नियुक्ति देने एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर जांच कदम पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है


कांग्रेस प्रवक्ता विवेक सोनी ने बताया कि नजमा बी जिनकी छतरी चौक स्थित चिकित्सालय में वैक्सीनेशन लगाने हेतु ड्यूटी लगी थी काम करते समय मंगलवार को उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया जिला प्रशासन द्वारा शासकीय अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था जहां पर कोई न्यूरो सर्जन डॉक्टर देखने वाला नहीं था ना ही इन्हें संबंधित बीमारी हेतु इलाज दिया जा रहा था तभी कांग्रेस अध्यक्ष महेश सोनी एवं प्रदेश प्रवक्ता नूरी खान के हस्तक्षेप के बाद निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जिसे स्वयं नूरी खान ड्राइवर नहीं मिलने पर एंबुलेंस चला कर ले गई थी और पीड़िता को भर्ती कराया था परंतु उपचार के दौरान पीड़िता की रात में ही मौत हो गई इस दौरान प्रशासन का कोई व्यक्ति पीड़ित महिला की सुध लेने तक नहीं आया जिससे यह ज्ञात हो गया है कि महावारी में अपनी जान जोखिम में डालकर रात दिन काम करने वाले कर्मचारी के प्रति शासन एवं प्रशासन कितना जिम्मेदार है  शासन प्रशासन के इस इस रवैया की कांग्रेस पार्टी कड़ी निंदा करती है और मुख्यमंत्री से मांग करती है कि नजमा भी को कोरोना योद्धा का दर्जा देते हुए इन्हें 50 लाख एवं उनके परिवार के किसी सदस्य को अनुकंपा नौकरी दी जाए वही मांग की है कि लापरवाही से नजमा भी की मौत हुई है इस मामले की जांच कराते हुए संबंधित अधिकारी पर कठोर कार्रवाई की जाए





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