जीरो के हीरो,,,,,, मौत के चंगुल से जिंदगी बचाने के जज्बे को सेल्यूट,,,,,,,मौत के सफर में दाव पर थी जिंदगी फिर भी मंजिल तक पहुंचने का हौसला कायम रहा,,,, न डरे,,,, न डरने दिया

 








उज्जैन जब पूरा देश लॉक था तब देश के डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ अनलॉक था, हर तरफ मौत का मंजर डरा रहा था तब देश के चिकित्सक मौत को मात देने के लिए अपनी जान की बाजी लगा रहे थे, मार्च 2020 में कोरोना ने देश में गदर मचाना शुरू किया जिसने जून 2021 में राहत दी, ऐसे समय 17 महीने के संघर्ष में देश के 14 सौ से अधिक डॉ .और एक लाख से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर मरीजों को जिंदगी देने का प्रयास किया ऐसे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को पूरा राष्ट्र नमन कर रहा है

आज डॉक्टर डे  पर यह खुशी की बात है कि उज्जैन में एक भी एक्टिव मरीज अब अस्पतालों में भर्ती नहीं है, कोरोना का नया कोई केस भी पिछले 6 दिन में नहीं आया, इसकी वजह प्रशासन की मेहनत तो है ही साथ ही शहर के अनेक चिकित्सकों की कड़ी मेहनत और जान की परवाह किए बगैर काम करने का जज्बा भी है, नोडल टीम के आर आर डॉक्टर रौनक एलची पिछले 450 दिनों से बगैर छुट्टी के काम पर है ,21 मार्च को उज्जैन में राबिया बी नामक महिला का पहला कोरोना केस आया था, इसके बाद 6 अप्रैल 2020 को रौनक एलची को आरआर टीम का नोडल अधिकारी बनाया गया , तब से लेकर आज तक लगातार अपनी टीम के 30 से अधिक सदस्यों के साथ जान पर खेलकर डॉक्टर रौनक एलची काम पर लगे हैं, डॉक्टर डे के दिन उनसे बात करने पर मारे खुशी के उनकी आंखों में आंसू छलक जाते हैं वह बताते हैं  मेरे लिए और शहर के उन तमाम चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ के लिए आज का दिन बेहद अहम है क्योंकि आज डॉक्टर डे पर हमें यह तोहफा मिला है, कि शहर में कोरोना का एक भी मरीज नहीं है ,रौनक एलची ने पिछले 450 दिनों में 1 दिन भी शासकीय अवकाश नहीं लिया यहां तक की रात को 3 से 5 घंटे की नींद और बच्चे और पत्नी से दूर रहे ताकि शहर के और जिले के कोरोना मरीजों की जिंदगी बचाई जा सके।

 ऐसे ही कॉविड 19 के नोडल अधिकारी डॉक्टर एचपी सोनानिया की कार्यशैली है, मार्च 2020 से लगातार कोरोना मरीजों की सेवा में जुटे डॉक्टर सोनानिया कई बार भूखे ही सोए, रात को 3:00 बजे तक कई बार मरीजों को देखा, जब पूरा शहर मौत की चितकारों से डरा हुआ था ,तब यह  सेनानी मोर्चे पर था और मौत से युद्ध करने को हर वक्त तैयार रहता था, डॉक्टर सोनानिया ने हजारों मरीजों को नया जीवनदान दिया है, ऐसे अनेक मरीज है जो मौत के मुंह से वापस घर पहुंचे हैं तो इसमें डॉक्टर एचपी सोनानिया की मेहनत ही है।

 कॉविड 19 के लिए जिले के सबसे बड़े अस्पताल आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर सुधाकर वैध की कहानी भी यही है ,24 घंटे में से 22 घंटे मरीजों के कॉल अटेंड करना और मरीजों की जिंदगी बचाना यही उनका पिछले 450 दिनों से रूटीन है, स्वयं भी कोरोना संक्रमित हो गए लेकिन बिस्तर में भी मरीजों की चिंता करने वाले डॉक्टर सुधाकर ने अनेक मरीजों की जान बचाई उन्होंने मौत को बेहद करीब से एक बार नहीं अनेक बार देखा है हमने जब उनसे बात की तो लगा कि अनेक जिंदगी बचाने वाले डॉक्टर सुधाकर को इस बात का मलाल है कि अनेक प्रयासों के बावजूद कुछ जिंदगी को नहीं बचा सके, अस्पताल पर अनेक आरोप भी लगे लेकिन कभी भी विचलित नहीं होने वाले डॉ सुधाकर ने मौत के चंगुल से अनेक मरीजों को बचाया है इसके लिए उन्होंने अपनी जान की बाजी भी लगाई है उनके अलावा अस्पताल के अनेक जूनियर डॉक्टर कोरोना की जंग जीत कर वापस ड्यूटी पर लौटे हैं कुछ ने प्राण भी गवाए है।

 डॉक्टर डे पर दैनिक मालव क्रांति इन चिकित्सकों को और इनकी तरह शहर के सभी चिकित्सकों के साथ-साथ देशभर में कोरोना काल तक में अपनी जान की बाजी लगाकर भी मरीजों की जिंदगी बचाने वाले लाखों चिकित्सकों को सेल्यूट करता है।

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