कोरोना काल : कैंसर पेशेंट के लिए अधिक त्रासदायी


  • कैंसर मरीजों के जरूरी ऑपरेशन
    भी टालना पड़ रहे दवाइयां देकर 
    कोरोना संक्रमण की भयावहता के चलते कैंसर अस्पताल में रुटीन के ऑपरेशन फिलहाल बंद कर दिए गए हैं। कीमो और रेडिएशन के लिए आने वाले नियमित मरीजों की संख्या भी प्रभावित हुई है।परिवहन के साधन नहीं होने से भी परेशानी है। हर मरीज के लिए संभव नहीं कि वह अपने खर्च पर निजी एंबुलेंस से आ जाए। कैंसर विशेषज्ञ भी सारी दिक्कतें समझ रहे हैं जिन मरीजों का ऑपरेशन करना जरूरी है कुछ तो वह भी सहमे हुए हैं और कुछ डॉक्टर भी दवाइयां देकर ऑपरेशन को लॉकडाउन खुलने तक टाल रहे हैं।


इंदौर ( कीर्ति राणा)
कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन कैंसर मरीजों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बनता जा रहा है। ऐसे मरीज जिनका ऑपरेशन करना जरूरी है, वक्त की नजाकत को देखते हुए कैंसर विशेषज्ञ अभी ऑपरेशन करने की अपेक्षा दवाइयों के डोज देकर ऑपरेशन की स्थिति को कुछ वक्त के लिए टालने का रास्ता निकाल रहे हैं। यह सब इसलिए करना पड़ रहा है मरीजों की प्राण रक्षा की जा सके।कोरोना के चलते कैंसर मरीजों की कीमोथैरेपी और रेडिएशन भी प्रभावित हुआ है।
कोरोना के संक्रमण का शिकार बुजुर्ग, शुगर, अस्थमा, टीबी और कैंसर मरीज जल्दी होते हैं ऐसे में इस वर्ग को अत्याधिक सावधानी बरतना जरूरी है।कैंसर फाउंडेशन के संस्थापक-कैंसर सर्जन
डॉ दिग्पाल धारकर बताते हैं सामान्य दिनों में 50 पेशेंट आते थे अब बमुश्किल 15 ही आ रहे हैं।अन्य जिलों से उपचार के लिए आने वाले मरीजों को अधिक दिक्कत है कारण जिलों की सीमा सील की हुई हैं।फिर भी राजस्थान सहित अन्य राज्यों के वो पेशेंट जिनके ऑपरेशन किए जा चुके हैं वे टांके कटवाने या फालोअप के लिए आवश्यक कागजात लेकर आते हैं तो उनका उपचार सहायक डॉक्टर्स कर रहे हैं।कीमो और ऑपरेशन वाले पेशेंट के परिजन भी लॉकडाउन की अनिश्चितता के कारण भी डिसिजन नहीं ले पा रहे हैं।
संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी की वयक्तिगत पहल पर संभाग के आठों जिलों में कैंसर फाउंडेशन ने शिविर आदि लगाए, परीक्षण-परामर्श भी दिया, इसी बीच राज्य में राजनीतिक परिदृश्य बदल जाने और कोरोना के चलते यह अभियान थम सा गया है।
गीताभवन अस्पताल के कैंसर विशेषज्ञ डॉ एसएस नैयर का कहना है कीमो और रेडिएशन तो कर रहे हैं लेकिन कैंसर मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं।इसकी एक वजह अस्पतालों में पर्याप्त स्टॉफ ना होना तो है ही दूसरा बढ़ा कारण हैं उपचार के लिए आने वाले मरीजों का प्रतिशत घटकर 40 फीसदी रह जाना।जरूरी ऑपरेशन वाले मरीज वीडियो कॉल पर संपर्क करते हैं, हम उन्हें सलाह देने से ज्यादा कुछ कर नहीं सकते।कई मरीज वीडियो कॉलिंग के दौरान कैंसर ग्रस्त हिस्से का परीक्षण करने और दवाइयां बताने का अनुरोध कर बैठते हैं। मरीज भी समझते हैं कि ऑपरेशन कराना ही पड़ेगा किंतु अभी के हालात के चलते दवाइयां लिख कर ऑपरेशन कुछ समय टालने का रास्ता निकाल रहे हैं।ऑपरेशन वाले पेशेंट को कीमोथैरेपी और टेबलेट बढ़ा दी है ताकि लॉकडाउन खुलने के बाद सर्जरी कर सकें।
डॉ नैयर के मुताबिक इस स्थिति को ज्यादा लंबा भी नहीं खींचा जा सकता, दुष्परिणाम यह है कि कैंसर की स्टेज वन वाला मरीज स्टेज थ्री में पहुंच सकता है और जो स्टेज थ्री में है उसकी जिंदगी मुसीबत में पड़ सकती है।सामान्य दिनों में गीताभवन अस्पताल में रोज 40-50 कैंसर पेशेंट आते थे जो घट कर 10 रह गए हैं, ऑपरेशन वाले तो आ नहीं पा रहे हैं।
बाणगंगा सामुदायिक केंद्र के मेडिकल ऑफिसर डॉ विभूति पाठक और स्टॉफ कैंसर मरीजों के प्रति अतिरिक्त संवेदनशील हैं।जिला अस्पताल भवन निर्माण के चलते कैंसर पेशेंट यहीं आ रहे हैं।उन्हें कीमो और रेडिएशन में परेशानी न आए इसका ध्यान रखते हैं लेकिन पेशेंट की संख्या प्रतिदिन 5 मरीज से घटकर सप्ताह में 2 ही रह गई है।अन्य दो अस्पतालों शैल्बी में रेडिएशन की सुविधा थी लेकिन अभी अस्पताल बंद है।अरबिंदो में रेडिएशन चल रहा है किंतु यहां भी सारा फोकस कोरोना संक्रमित मरीजों पर है।
अन्य शहरों के मरीजों के लिए वहीं कराई
कीमो थैरेपी की अस्थाई व्यवस्था 
एमवाय अस्पताल से सटे शासकीय ग्यारह पंच कमेटी) कैंसर अस्पताल अधीक्षक डॉ रमेश आर्य का कहना था पहले 2-3 ऑपरेशन रोज हो जाते थे लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते प्रशासन के आदेश पर कैंसर मरीजों के रुटीन सर्जरी केस तो फिलहाल बंद हैं। बहुत जरूरी ऑपरेशन भी एमवायएच की ओटी में कर रहे हैं।सामान्य दिनों में ओपीडी में 15 नए और 50 पुराने कैंसर मरीज तो नियमित आ ही जाते थे अब बमुश्किल 15 आ रहे हैं।इनमें भी 5 जिले के विभिन्न गांवों के रहते हैं।अन्य शहरों के जो पेशेंट कीमो, रेडिएशन के लिए आते थे, सब की हैसियत नहीं कि अपने खर्चे पर निजी एंबुलेंस से इंदौर आ जाए। गरीब पेशेंट की परेशानी को देखते हुए खंडवा जिला अस्पताल सीएमओ डॉ मंडलोई से चर्चा कर वहां कीमो शुरु कराई है, यहां से हम गाइड कर देते हैं। इसी तरह मंदसौर, धार आदि शहर में कीमो के लिए डॉक्टरों को गाइड कर रहे हैं। उज्जैन में तो कैंसर मरीजों का उपचार चल ही रहा है।
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हर 8 सैकंड में एक कैंसर मरीज की मौत*
भारत में कैंसर मरीजों की मौत का आंकड़ा 24 घंटे में 3500 का है। यानी हर 8 सैकंड में एक मरीज की मौत।
सामान्य दिनों में प्रतिवर्ष 10 लाख मरीजों की मौत अनुमानित है।
कोरोना त्रासदी-लॉक डाउन वाले इन महीनों में समुचित उपचार के अभाव (दो माह) में देश में 1.50 लाख मरीजों की मौत की आशंका है।
यही नहीं जो मरीज अभी कैंसर की स्टेज वन से गुजर रहे हैं, वे तेजी से स्टेज थ्री में तब्दील हो सकते हैं।यह स्थिति भयावह हो सकती है।
ऐसे में प्रतिवर्ष नए पेशेंट का 1.25 लाख का आंकड़ा भी बढ़ जाएगा।
*आंकड़े कैंसर विशेषज्ञ डॉ एसएस नैयर के मुताबिक 
(लेखक देश के जानेे-माने पत्रकारऔर चिंतक हैै)


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